चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार के प्रमुख निवारक स्वास्थ्य कार्यक्रम ‘निरोगी हरियाणा’ ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस योजना के तहत अब तक एक करोड़ से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच (स्क्रीनिंग) की जा चुकी है, जबकि 5.86 करोड़ से अधिक लैब टेस्ट निःशुल्क किए गए हैं। इससे राज्य में बीमारियों की समय पर पहचान और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को व्यापक मजबूती मिली है। हरियाणा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने यह बात उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान कही। उन्होंने बताया कि 21 अप्रैल, 2026 तक इस योजना के अंतर्गत अंत्योदय परिवारों के 1,00,07,430 लाभार्थियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए शुरू की गई इस पहल के तहत 5,86,60,875 मुफ्त लैब टेस्ट किए गए हैं, जिससे हजारों परिवारों का होने वाला खर्च कम हुआ है।
उन्होंने बताया कि प्रारंभ में यह योजना उन परिवारों के लिए लागू की गई थी, जिनकी वार्षिक आय 1.8 लाख रुपये तक थी। अब इसका विस्तार कर 3 लाख रुपये तक आय वाले परिवारों को भी शामिल किया गया है। इस बदलाव से लाभार्थियों की संख्या 1.59 करोड़ से बढ़कर लगभग 2.30 करोड़ हो गई है। तीसरे चरण में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देशानुसार 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों को, उनकी आय चाहे कितनी भी हो, इस योजना में शामिल किया जा रहा है। यह कदम बुजुर्गों के स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
डाॅ मिश्रा ने बताया कि यह कार्यक्रम अब केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के घर-घर तक पहुंच बना रहा है। इसके तहत 1,11,116 आउटरीच कैंप आयोजित किए गए, जिनमें 38.63 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स द्वारा 12,579 कैंप लगाकर लगभग 2.8 लाख लोगों तक सेवाएं पहुंचाई गईं। साथ ही, 25,907 आंगनवाड़ियों, 14,316 स्कूलों तथा 13,034 औद्योगिक एवं उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में भी स्क्रीनिंग की गई है। जिससे सभी आयु वर्गों और क्षेत्रों के लोगों को इस योजना का लाभ मिल सके।
उन्होंने बताया कि ‘निरोगी हरियाणा’ कार्यक्रम आयु वर्ग के अनुसार विशेष स्वास्थ्य जांच की सुविधा प्रदान करता है। इसमें शारीरिक जांच, आवश्यक संकेतों की निगरानी, लैब जांच, रोगों की पहचान, उपचार तथा आवश्यकता अनुसार उच्च संस्थानों में रेफरल जैसी सेवाएं शामिल हैं। यह कार्यक्रम एनीमिया, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, कैंसर और जन्मजात विकारों जैसी बीमारियों की समय रहते पहचान सुनिश्चित करता है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि इसके माध्यम से कई गंभीर बीमारियों का शुरुआती चरण में ही पता चल पाया है। कैंसर, हृदय रोग, मस्तिष्क संबंधी दुर्लभ बीमारियों और गंभीर एनीमिया से पीड़ित मरीजों को समय रहते उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों में भेजकर उपचार उपलब्ध कराया गया, जिससे अनेक जीवन बचाने में मदद मिली है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट में की गई घोषणा के अनुसार, अब यह कार्यक्रम 70 वर्ष से ज्यादा आयु के सभी नागरिकों को कवर करेगा, चाहे उनकी आय कितनी भी हो। इस कदम से बुजुर्ग नागरिकों को सुरक्षा का एक बड़ा सहारा मिलेगा। इस योजना के तहत अब तक कुल 8,69,966 रोगों की पहचान की जा चुकी है। इनमें एनीमिया के 2,99,090, उच्च रक्तचाप के 1,33,528, डायबिटीज के 1,05,238, हृदय रोग के 6,410, कैंसर के 1,257 तथा टीबी के 3,518 मामले शामिल हैं।
यह पहल शुरुआती 32 स्थानों से बढ़कर अब पूरे राज्य में 2,000 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों तक विस्तारित हो चुकी है। इस कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन में डिजिटल प्लेटफॉर्म, सुदृढ़ प्रयोगशाला नेटवर्क, प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों और सतत निगरानी प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिससे पारदर्शिता और कार्यकुशलता सुनिश्चित हो रही है।
