बसुरेश चंद रमोला
उत्तरकाशी
पिछले साल आपदा से छतिग्रस्त कन्या जूनियर, प्राथमिक विद्यालय और कन्या हाईस्कूल का पैदल मार्ग पूरी तरह से छतिग्रस्त हो गया था जो साल बीतने को है और अभी तक प्रशासन ने इसकी सुध तक नही ली जिससे इन विद्यालयों मे पढने वाले नौनिहालों को आने जाने मे कठिनाइयों का सामना करना पड रहा है।
इन विद्यालयों के अलावा डांग, जसपुर, ओल्या के गांवो के ग्रामीणों का भी यह मुख्य संम्पर्क मार्ग है और गेंवला के ग्रमीण भी इसी रास्ते से खेती किसानी का काम करते है। यह मार्ग पिछली आपदा मे ब्रह्मखाल के पास तीन जगहों से टूट गया था जो कि आज तक नहीं बनाया गया। क्षेत्रीय जनप्रतिनियों ने कई बार शासन प्रशासन को लिखित और मौखिक रूप से अवगत भी कराया मगर आज तक भी किसी ने इसकी सुध तक नही ली। ग्रामीण और स्कूली बच्चे लोगों के कास्त की खेती को लांघ कर आवागमन करने को मजबूर है जहाँ उन्हे किसान ताने भी सुनाते है मगर सिस्टम की लापरवाही के आगे उनकी ये मजबूरी बन जाती है। इस छतिग्रस्त मार्ग का अब प्रतिकूल असर स्कूलों के प्रवेश पर पढने लगा है अभिभावक अपने पाल्यों को जोखिम मे नही डालना चाहते है। यह भी बता दें कि आल वैदर सडक चौडीकरण से यह संपर्क मार्ग पूरी तरह टूटा था मगर कार्यदाई संस्था रानी कन्स्ट्रक्सन ने इस रास्ते को बनाकर तैयार भी किया मगर कुछ ही समय बाद भारी बारिस से यह मार्ग टूटा और आज तक दोबारा नही बनाया गया। उक्त गांवो के प्रधानो ने कहा कि यदि सीघ्र ही छतिग्रस्त मार्ग को नही बनाया जाता है तो ग्रामीण सीघ्र ही उग्र आंदोलन करने को मजबूर हो जायेगे।

