गढ़ पर्वत पर स्थित माँ रेणुका शक्तिपीठों में पौराणिक आदि शक्ति पीठ

रमोला न्यूज/जसपाल सिंह

उत्तरकाशी-विकास खंड डुंडा के गढ़ गाँव में गढ़ पर्वत पर विराजमान प्रसिद्ध सिद्धपीठों में माँ रेणुका एक प्रमुख दिव्य और आलोकिक शक्ति स्थल है, जिसकी नाकुरी सड़क से पैदल दूरी लगभग पौने दो किमी. से ढाई तीन किमी. खड़ी व सीधी पैदल यात्रा है, अधिकतर श्रद्धालू अब गाड़ी से भी सिद्धपीठ माँ रेणुका के दर्शन करनें दूर-दूर से गढ़ पर्वत मातारानी के दर्शन करनें आते हैं। गढ़ पर्वत पर स्थित माँ रेणुका शक्तिपीठों में पौराणिक आदि शक्ति पीठ है, वहीं नव संवत्सर् (नववर्ष) चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के प्रथम चैत्र (वासंतिक) मार्च-अप्रैल नवरात्रियों से इस तपस्थली पर भक्तों के आनें-जानें के साथ 3गते बैसाख में ऐतिहासिक पौराणिक मेले में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ देखनें को मिलती है, इतना ही नहीं आश्विन (शारदीय) सितंबर-अक्टूबर (शरदऋतु) के मुख्य नवरात्रियों पर भी भक्तों की भारी भीड़ देखनें को मिलती है।

गढ़ पर्वत पर स्थित सिद्धपीठ माँ रेणुका की तपस्थली माँ भगवती रेणुका जमदग्नि ऋषि की पत्नी और परशुराम की माता है, केदारखंड स्कंद पुराण में वर्णित गढ़ पर्वत पर विराजमान माँ रेणुका का वर्णन मिलता है, चैत्र नवरात्रि के अलावा सबसे प्रमुख नवरात्रि आश्विन (क्वार) माह में आती है, जिसे शारदीय नवरात्रि कहा जाता है, यह नवरात्रि सितंबर-अक्टूबर के आसपास आती है, इस नवरात्रि में भी भक्तों की भीड़ देखते बनती है, इसके अतिरिक्त, वर्ष में दो और नवरात्रि (गुप्त नवरात्रि) भी होती हैं, जो माघ (माह) जनवरी-फरवरी और आषाढ़ (माह) जून-जुलाई के महीने में पड़ती हैं, जिसमें गढ़ गाँव के पंडा पुरोहित माँ शक्ति रेणुका के शक्तिपीठ और दिव्य स्थान पर बैठकर पूजा, पाठ, दुर्गा सप्त सती चण्डी पाठ कर माँ रेणुका को गुप्त रूप से प्रसन्न करते हैं।
भगवती देवी नव दुर्गा के नौ स्वरूपों में नवरात्रियों के मौके पर इस पौराणिक सिद्धपीठ गढ़ पर्वत पर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था, श्रद्धा, शक्ति और अट्टू विश्वास का अनूठा संगम देखनें को मिलता है, दूर दूर से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, कुछ श्रद्धालू नँगे पैर पैदल यात्रा कर माँ रेणुका का आशीर्वाद लेते हैं, तो अधिकांश गाड़ी के रास्ते चल माँ भगवती रेणुका से कामना करते हैं, देवी माँ के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से शाम तक लगती रही, सिला पर बैठे मुख्य पुजारी पंडित गणेश प्रसाद शास्त्री नें भारी भीड़ में भी सिद्धपीठ माँ बलवती भगवती रेणुका के दर्शन सभी भक्तों को पूजा अर्चना आरती के साथ कराए, श्रीमद् देवी भागवत महापुराण के स्कंद पुराण के 202 अध्याय में रेणुका देवी के दर्शन का वर्णन मिलता है, इसलिए माँ रेणुका को सिद्धपीठ माना जाता है, कहा जाता है कि यहां पर माँ रेणुका नें दस हजार वर्ष तक तपस्या और पूजा पाठ इत्यादि किया, यहाँ पर माँ रेणुका के दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। बेशक छणिक राजनीतिक स्वार्थ के लिए कुछ लोग आज भी देवी देवताओं का राजनीतिकरण करते नहीं थक रहे हैं, याद रहे किसी भी देवी-देवताओं के नाम, पहचान और सिद्धपीठों के साथ छेड़खानी समाज, संस्कृति और खुद लिए भी घातक है।
सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा होती है, उनका रूप उग्र काले वर्ण, खुले केश, अग्निमय नेत्र लेकिन यह स्वरूप विनाश का नहीं, बल्कि सुरक्षा का है, वे बुरी शक्तियों का अंत कर जगत को सुरक्षा देती हैं, नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है, वे सभी सिद्धियों की दात्री मानी जाती हैं, कथाओं में कहा गया है कि देवताओं नें उनसे शक्ति प्राप्त की और शिव नें भी उनके आशीर्वाद से पूर्णता पाई, यह स्वरूप बताता है कि जब प्रयास, विश्वास और संयम एक हो जाएं, तब सिद्धि मिलती है, नवरात्रि का गहरा सामाजिक संदेश नवरात्रि हमें सिखाती है कि जीवन केवल एक रूप नहीं है, नौ देवियों के नौ स्वरूप जीवन के नौ पाठ धैर्य, तप, साहस, ऊर्जा, मातृत्व, न्याय, निर्भयता, पवित्रता और पूर्णता हैं। चैत्र नवरात्रि के इस पावन मौके पर गढ़ पर्वत पर सिद्धपीठ माँ रेणुका के दर्शन के लिए कविता बिष्ट, वैष्णवी विष्ट, विभा राणा, मीना देवी, डौली राणा, अनिता, जयवर्धन बिष्ट, उर्वशी, समृद्धि बिष्ट, स्मृति मियाँ, प्रेरणा, आस्था पंवार, राजेंद्र सिंह, यतेंद्र सिंह, रघुवीर राणा, गजेंद्र राणा, यशवंत रावत कई श्रद्धालुओं नें माथा टेक मनोकामनाएं मांगी।

 

 

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