रमोला न्यूज/जसपाल सिंह
देहरादून-विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी इशारों-इशारों में खुद के बिना 2027 विधानसभा चुनाव पार्टी के लिए आसान नहीं बता रहे हैं, बेशक पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत बुजुर्ग नेता हो गए लेकिन उनके पास अनुभवों के पिटारे में बहुत कुछ अच्छे बुरे अनुभव गाँठ बाँध रखे होंगे, प्रदेश हाई कमान जहाँ हरीश रावत को बुजुर्ग और पूर्व मुख्यमंत्री मान किनारे करनें में लगा है, वहीं पार्टी के लिए समर्पित सोच से लेकर कर्मठ कार्यकर्ता तक हरीश रावत अभी भी सक्रिय हैं। अपनें 59 वर्षों से अधिक के परिणय-सूत्र बंधन के इस लंबे दौर में निरंतर कर्तव्यरत रहनें के दौरान एक छोटा अर्जित अवकाश लेना पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का स्वाभाविक अधिकार बनता है, इस अटूट गठबंधन के दौरान कभी-कभी कुछ ऐसे क्षण आ जाते हैं, जब कोई भी थोड़ी असहजता का अनुभव कर सकता है।
पूर्व मुख्यमंत्री किस बड़े परिप्रेक्ष्य में स्थितियों को समझने-समझानें की बात कर रहे हैं वो पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ही जानें, लेकिन विनतीपूर्वक अपनें अर्जित अवकाश को लेकर पक्ष-विपक्ष न बनाए जाने पर विशेष जोर देते नजर आ रहे हैं, इंडियन नेशनल कांग्रेस के अपनें ही साथी उत्तराखंड विधान सभा में सदस्य (2002–2022) गोविंद सिंह कुंजवाल से लंबा मानसिक, भावनात्मक संबंध बताकर उनके शब्द बेशक स्वाभाविक भ्रातृवत् बता दिये गए हों, तो वहीं कुछ को पितृवत मान उनकी भावनाओं को समादर दिया गया है, पूर्व मुख्यमंत्री होंनें के बाद भी खुद को छोटा, सहज, सरल, कार्यकर्ता बतानें वाले हरीश रावत माफ़ी माँगते ही नजर आ रहे हैं, यही बड़े नेतृत्व की पहचान होती है, मुझको लेकर उत्सुकता रहने वाले समीक्षकों का आभारी व्यक्त करते नजर आते हैं।
59 वर्षों की अथक यात्रा के दौरान एक मुख्यमंत्री होंने के बाद भी खुद को पार्टी का कार्यकर्ता बताना यह हरीश रावत की श्रेष्ठता है, अंतिम रूप से पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व का निर्णय ही शिरोधार्य माननें वाले रावत नें विनती की होगी, मगर अनंतोगत्वा शीर्ष के निर्णय को ही शिरोधार्य करनें की बात करते खुद को पार्टी का सिपाही समझते हैं, सोशल मीडिया में इतने लंबे व्रत जो अब संकल्प का रूप ले चुका है, वह अब न टूटेगा और न बदलेगा, अवकाश के दौरान भी मैं निरंतर सक्रिय हूँ और निरंतर अपनी हड्डियाँ घिस रहा हूँ, इस लंबे अंतराल के दौरान मेरा कई लोगों, समूहों, क्षेत्रों, मान्यताओं, जन अपेक्षाओं के साथ जुड़ाव रहा है, जीवन के इस मोड़ में मुझे उनके परामर्श की भी आवश्यकता है और उनसे अपने जुड़ाव को दोहराने के लिए उनके मध्य जानें की आवश्यकता को भी मैं महसूस कर रहा हूँ।
अलग थलग पड़े पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत कहते हैं कि विधानसभा 2027 में अपनें लिए जिनको संभावनाएं दिखाई दे मैं हरीश रावत महर्षि दधीचि की तरह अपनी हड्डियाँ देंने को तैयार बैठा हूँ, वृत्रासुर नामक राक्षस से देवताओं की रक्षा करने के लिए जब कोई अस्त्र काम नहीं आया, तो महर्षि दधीचि नें लोक कल्याण के लिए अपने शरीर का त्याग कर दिया, उनकी अस्थियों से बना वज्र ही वृत्रासुर के अंत का कारण बना, राजनीति के कूटनीतिज्ञ पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत विधानसभा चुनाव 2027 में किसे राक्षस मान बैठे, किसे देवता, और कौनसे अस्त्र को चूक बताकर महर्षि दधीचि द्वारा लोक कल्याण के लिए दी गयी हड्डियों की तरह प्रदेश के कल्याण के लिए हरीश रावत अपनी हड्डियाँ देकर किस वृत्रासुर के अंत करनें की ओर इशारा कर रहे हैं, यह 2027 विधानसभा परिणाम ही बतायेंगे।
