तिलक चंद रमोला / रमोला न्यूज़
नौगांव: अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर रविवार को वेदमंत्रोचार के साथ देवदार,बांज एवं बुरांश के जंगल में सरूका स्थित शिरगुल महाराज मंदिर के कपाट श्रृद्धालुओं के लिए खुल गये।
जहां कमल सिरांई, बाबर जौनसार एवं हिमाचल क्षेत्र से इष्ट शिरगुल महाराज के मंदिर तथा धार्मिक आस्था के चिन्ह ओखली से निकलते अमृत स्वरूप जल को पीनें व दर्शन करनें रात्रि जागरण को भारी संख्या में सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे।
कपाट खुलने के बाद रात्रि जागरण के दूसरे दिन पंरपरा पारंपारिक रूप से भव्य मेले में कथियान व बाबर तथा त्यूणी क्षेत्र से लोग ढ़ोल नगाड़ों के साथ मेले में गांव-गांव से लोग शामिल होते हैं।
मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच कर शिरगुल
महाराज मंदिर में पूजा अर्चना कर क्षेत्र व परिजनों की कुशल क्षेम की मन्नतें मांगते हैं।
क्षेत्र के इष्ट शिरगुल महाराज का प्राचीन मंदिर पुरोला तहसील मुख्यालय से 8 किमी कुफारा गांव तक वाहन से एवं लगभग 10 किमी बांज बुरांश के जंगलों के बीच पगडंड़ी पर कठीन पैदल यात्रा तय कर मंदिर परिसर में पहुंचे।
10 किमी बांज बुरांश जंगल के बीच यह पैदल यात्रा धार्मिक और भी विशेष बनाती है।
मेले के अवसर पर जौनसार,बावर,रवांई क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन पहुंचते हैं।
हालांकि हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं की मेले में भीड़ से पेयजल की भारी किल्लत एक बड़ी समस्या बनी रही।
मंदिर समिति के उपेंद्र शर्मा,राजेंद्र शर्मा,सोबन शर्मा,मनमोहन शर्मा,कमलाराम शर्मा,अनिल शर्मा, संजय शर्मा और वीरेंद्र शर्मा का कहना है कि मेले के दिन भारी भीड़ के चलते पेयजल की व्यवस्था कम पड़ जाती है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर परिसर तक पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाए, साथ ही, श्रद्धालु पूरी रातभर जागरण करते हैं, इसलिए प्रकाश व धर्मशालाओं की व्यवस्था की जाए ।
