कंप्यूटरीकृत व्यवस्था को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे-खाद्यान्न अधिकारी*

 

जसपाल सिंह/रमोला न्यूज

उत्तरकाशी-सरकार द्वारा चलाई जा रही गरीब अन्न कल्याण योजना भले ही आजादी के बाद से गरीबों को आंगुलिक वितरण की जाती रही हों, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चलाई जा रही डिजिटल इंडिया व्यवस्था की मजाक उड़ाकर अधिकारी डिजिटल इंडिया कंप्यूटरीकृत व्यवस्था को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं, मामला जनपद मुख्यालय उत्तरकाशी का है जब गल्ला विक्रेता गोदाम में तीन माह की राशन एक साथ उठानें खाद्यान्न अधिकारी के पास गया, तो खाद्यान्न अधिकारी द्वारा घटतौली के बाद भी 3 कट्टे 33 किलो गेंहूँ जबकि 3 कट्टे 06 किलो चावल और चीनी घटाकर पर्चे में लिखित देख गल्ला विक्रेता नें गाड़ी बुलानें व गल्ला उठानें से मना कर दिया, विक्रेता चोर नहीं सरकारी तंत्र की घटतौली और अत्यधिक कटिंग से राशनकार्ड धारकों के बीच उसे जोर जबरदस्ती चोर बनाया जा रहा है, आलम यह है कि बायोमेट्रिक वितरण प्रणाली के बाद भी विक्रेता अधिकारियों की सह में राशन कॉर्ड धारकों के साथ आँख मिचोली खेल रहे है।

 

देश का बच्चा, बुजुर्ग, महिला, जवान, किसान जहाँ प्रधान सेवक के डिजिटलीकरण को चाय की दुकान से लेकर चाय के बागानों तक स्वीकार कर रहा है, वहीं कंप्यूटरीकृत के बाद भी विभागों में इस तरह का भ्रष्टाचार चोरी प्रधानमंत्री मोदी के डिजिटल इंडिया स्कीम को चिढ़ानें का काम कर रहा है, 140 करोड़ आबादी वाले प्रधानमंत्री मोदी का परिवार और राशन कॉर्ड धारकों के मन में यक्ष प्रश्न बना हुआ है कि डिजिटल इंडिया के बाद भी भ्रष्टाचार कैसे फल-फूल और बढ़ रहा है, बेशक प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मंचों से भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनानें की बात करते आए हैं लेकिन धाकड़ धामी की नाक के नीचे ही प्रधानमंत्री के सपनों का भारत, उनकी सबसे महत्वकांक्षी डिजिटल इंडिया स्कीम उत्तराखंड प्रदेश में ही धक्के खाते नजर आ रही हैं।

 

देश की आजादी के बाद बनती बिगड़ती सरकारों में बिना कंप्यूटरीकृत खाद्यान्न बँटता तो था लेकिन सरकार के पास पुख्ता आधार सामग्री की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं हो पाती थी, जिससे देश के विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार व्याप्त था, प्रधानमंत्री बननें के बाद नरेंद्र मोदी सरकार नें कंप्यूटरीकृत व्यवस्था को सभी विभागों में पूर्ण रूप से लागू करने के प्रबंधन पर जोर दिया, उसे धता बता रहे अधिकारियों की मिली भगत के बाद भी राशन कार्ड धारकों को पूरी राशन नहीं मिल पा रही है, इतना ही नहीं डीलरों को चोरी करनें पर मजबूर किया जा रहा है, प्रधानमंत्री गरीब अन्न कल्याण योजना पात्र गरीबों तक नहीं बल्कि अधिकारियों की मिली भगत से अपात्र लोगों तक पहुंचाई जा रही है, इसका संज्ञान प्रशासन और सरकार दोनों को मिलकर रखना होगा ताकि दीनहीन निर्धन परिवारों तक साफ और शुद्धता के साथ राशन पहुँच सके।

 

सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता राष्ट्रीय मानदेय संघर्ष समिति के राष्ट्रीय महासचिव जशपाल बिष्ट का कहना है कि घटतौली के बाद भी गोदामों से वितरण खाद्यान्न में कटौती, अपनें ही लगाए भाड़े व लाभांश में 15 से 20 प्रतिशत कमीशनखोरी गल्ला विक्रेताओं को चोरी करानें को मजबूर कर रही हैं, या मजबूर किया जा रहा है, जहाँ सरकारी सस्ता गल्ला बाँट रहे गल्ला विक्रेता, बिना मानदेय के समाज सेवा कर रहे हैं वहीं पूर्ण रूप से कंप्यूटरीकृत हुई खाद्यान्न योजना भारी भरकम वेतन लेंनें वाले खाद्यान्न अधिकारियों को रास नहीं आ रही है, पूर्व से ही चलती आ रही भ्रष्टाचारी की लत को मुख्यमंत्री धुरंधर धामी के धाकड़ कार्यकाल में राशन की दुकानों को चोरी करनें का अड्डा बना रही है, इसका सबसे बड़ा कारण लोकल क्षेत्रीय अधिकारियों का खुद के जनपद में बिना डर भय दबंगई करना है, इस तरह के गलत राशन आबंटन को समय रहते सुधारा नहीं जाता है तो गल्ला विक्रेता सड़कों पर आनें को मजबूर होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन और उपरोक्त अधिकारी की होगी।

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