नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में चंडीगढ़ में महिलाओं का जन आक्रोश, तिरंगे के साथ गूंजा सेक्टर-17 प्लाजा*

 

 

सुरेश कुमार /रमोला न्यूज़

चंडीगढ़। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में आज चंडीगढ़ के सेक्टर-17 प्लाजा में विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं एनजीओ के तत्वावधान में एक विशाल जन आक्रोश महिला पदयात्रा का आयोजन किया गया। इस पदयात्रा में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर एकजुटता का परिचय दिया और कांग्रेस एवं उसके सहयोगी दलों द्वारा इस ऐतिहासिक विधेयक के विरोध को महिला शक्ति का अपमान करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

पदयात्रा का दृश्य अत्यंत प्रेरणादायक और उत्साहवर्धक रहा, जब महिलाओं ने हाथों में तिरंगा झंडा लेकर संगठित रूप से जन आक्रोश पदयात्रा निकाली। “भारत माता की जय” और “नारी शक्ति जिंदाबाद” के गगनभेदी नारों से पूरा सेक्टर-17 प्लाजा देशभक्ति और जोश से सराबोर हो गया। तिरंगे की छांव में महिलाओं का यह विराट स्वरूप न केवल उनके आत्मसम्मान का प्रतीक बना, बल्कि यह भी दर्शाता है कि देश की महिलाएं अब अपने अधिकारों के लिए हर स्तर पर आवाज उठाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

पदयात्रा के दौरान महिलाओं ने जोरदार नारों के माध्यम से अपने आक्रोश को व्यक्त किया और स्पष्ट संदेश दिया कि देश की आधी आबादी के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। महिलाओं ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि देश की महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जिसका विरोध करना महिला सशक्तिकरण के खिलाफ खड़े होने के समान है।

इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी, चंडीगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र पाल मल्होत्रा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने पदयात्रा को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा से नारी शक्ति के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध रही है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिससे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने उपस्थित महिलाओं के उत्साह और जागरूकता की सराहना करते हुए विश्वास दिलाया कि भाजपा हर स्तर पर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य करती रहेगी।

इस जन आक्रोश महिला पदयात्रा में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री रामवीर भट्टी एवं प्रदेश महामंत्री संजीव राणा भी उपस्थित रहे। इनके साथ ही प्रदेश मीडिया प्रभारी रवि रावत भी विशेष रूप से कार्यक्रम में उपस्थित रहे और उन्होंने इस जन आंदोलन में महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी को सराहते हुए इसे समाज में बढ़ती जागरूकता और नारी शक्ति के सशक्त उभार का प्रतीक बताया। सभी नेताओं ने महिलाओं के उत्साह का स्वागत करते हुए कहा कि यह पदयात्रा देश में महिला सशक्तिकरण के प्रति बढ़ती जागरूकता का प्रमाण है तथा भारतीय जनता पार्टी महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के लिए हर समय प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी इस दिशा में निरंतर कार्य करती रहेगी।

कार्यक्रम में चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी, पूर्व मेयर सर्वजीत कौर एवं पूर्व मेयर हरप्रीत कौर बबला ने भी इस जन आक्रोश महिला पदयात्रा में भाग लेकर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने महिलाओं की इस ऐतिहासिक भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की महिलाओं को नई दिशा और सशक्त पहचान देने का कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं की आवाज को दबाने का प्रयास अब सफल नहीं होगा और देश की महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति पूर्ण रूप से जागरूक हैं।

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं हिमाचल प्रदेश के सह-प्रभारी संजय टंडन इस जन आक्रोश महिला पदयात्रा में उपस्थित रहे और उन्होंने महिलाओं के उत्साहपूर्ण सहभाग की सराहना की।

भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष हीरा नेगी भी इस पदयात्रा में सक्रिय रूप से शामिल हुईं और उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि महिलाओं की एकजुटता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और आज की यह पदयात्रा उसी का प्रतीक है।

इस अवसर पर युवा मोर्चा की प्रदेश महामंत्री प्रिया पासवान ने जनसमूह को प्रभावशाली ढंग से संबोधित करते हुए कहा कि आज की नारी केवल अपने अधिकारों के प्रति जागरूक ही नहीं, बल्कि उन्हें प्राप्त करने के लिए पूरी तरह संकल्पित भी है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की महिलाओं को नई पहचान और सशक्त भूमिका प्रदान करेगा तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए सशक्त मार्ग प्रशस्त करेगा।

कार्यक्रम के अंत में सभी महिलाओं ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे नारी सम्मान और अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेंगी और ऐसे किसी भी प्रयास का विरोध करेंगी जो महिला सशक्तिकरण के मार्ग में बाधा बने। यह जन आक्रोश महिला पदयात्रा न केवल महिलाओं की शक्ति का प्रदर्शन थी, बल्कि यह स्पष्ट संकेत भी था कि देश की महिलाएं अब अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक, संगठित और सजग हैं।

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