आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसदों द्वारा पाला बदलने के बाद पंजाब की सियासत में भूचाल आ गया है। इस घटनाक्रम के बीच सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। साहनी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कदम उठाने से पहले पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी और उनके मन में सीएम भगवंत मान या केजरीवाल के प्रति कोई गिला-शिकवा नहीं है। केजरीवाल से मुलाकात: साहनी ने बताया कि वह बुधवार को अरविंद केजरीवाल से मिले थे। वहां उन्होंने अपनी बात रखी, जिस पर केजरीवाल ने उन्हें इस्तीफा देने की सलाह दी थी। साहनी इस्तीफा देने का मन बना चुके थे, लेकिन सलाहकारों ने उन्हें बताया कि इससे ‘दो-तिहाई’ (Two-Third) नियम का गणित बदल जाएगा।
गद्दारी के आरोप पर जवाब: सीएम मान द्वारा ‘गद्दारी’ शब्द के इस्तेमाल पर साहनी ने कहा, “हमने पंजाब या पंजाबियों से कोई गद्दारी नहीं की है। हम आज भी पंजाब की सेवा के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
सेंटर-स्टेट तालमेल: उन्होंने तर्क दिया कि जब तक केंद्र और राज्य के बीच लड़ाई रहेगी, पंजाब का विकास बाधित रहेगा। पंजाब फिलहाल ‘ICU’ में है और इसे बचाने के लिए मजबूत केंद्रीय समर्थन की जरूरत है।
मर्यादा में रहेंगे: साहनी ने कहा कि वे संसद में पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ और पानी के मुआवजे जैसे मुद्दे मर्यादा में रहकर उठाते रहेंगे।
संत सीचेवाल का खुलासा: “राघव चड्ढा ने ‘आजाद ग्रुप’ के लिए फोन किया था”इसी मामले में एक और बड़ा खुलासा संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने किया है। उन्होंने बताया:
राघव चड्ढा की अप्रोच: राघव चड्ढा ने उन्हें 16, 17 और 18 अप्रैल को चाय पर बुलाया था।
आजाद धड़े का प्रस्ताव: सीचेवाल के अनुसार, उन्हें फोन कर बताया गया था कि एक ‘आजाद ग्रुप’ बनाया जा रहा है जिस पर सबने साइन कर दिए हैं।
सीधा इनकार: सीचेवाल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस ग्रुप का हिस्सा बनने से साफ मना कर दिया और उनकी इस संबंध में कोई मुलाकात नहीं हुई।
विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा कि वे राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं, लेकिन जितना उन्होंने कानून पढ़ा है, सांसदों का यह कदम ‘दो-तिहाई’ विलय (Merger) के नियम के तहत आता है। फिलहाल मामला राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में है, लेकिन साहनी ने साफ किया कि वे सांसद पद से इस्तीफा देने को तैयार नहीं हैं।
