चुनाव में महिलाओ के आरक्षण के नाम पर राजनीतिक नोटंकी एवं ढोंग करना बंद करे बीजेपी- ओ पी सिहाग 

 

रोमी सिंह /रमोला न्यूज़

पंचकूला , 29 अप्रैल: जननायक जनता पार्टी पंचकूला के जिला अध्यक्ष ओ पी सिहाग एवं जजपा महिला इकाई की प्रदेश प्रभारी डॉक्टर किरण पूनिया ने सयुंक्त ब्यान में कहा है कि पिछले कई दिनों से पूरे देश में बीजेपी के बड़े नेताओं से लेकर छोटे से कार्यकर्ताओं तक ने देश में आगे होने वाले लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के नाम पर आसमान सिर पर उठा रखा है तथा विपक्षी दलों के खिलाफ धरना प्रदर्शन किए जा रहे हैं कि उन्होंने ये बिल पास नहीं होने दिया। जबकि य़ह बिल 2023 में पहले ही पास हो चुका है। जजपा ज़िला अध्यक्ष ओ पी सिहाग ने कहा कि पंचकूला, सोनीपत में भी बीजेपी ने इस मुद्दे पर खूब हंगामा किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को घेरने आम जनता में बदनाम करने के लिए प्रदेश की बीजेपी की सरकार ने 27 अप्रैल को एक दिन का स्पेशल अधिवेशन भी बुलाया जिसमें नारी शक्ति वन्दन के समर्थन में प्रस्ताव पारित करवाया। इस अधिवेशन में कहा गया की देश की विपक्षी पार्टियां नहीं चाहती कि महिलाए राजनीति में सशक्त हो,उनकी ज्यादा भागीदारी हो।

जजपा ज़िला अध्यक्ष ओ पी सिहाग एवं महिला प्रभारी डॉक्टर किरण पूनिया ने कहा कि बीजेपी नेताओं की कथनी एवं करनी में बहुत बड़ा अन्तर है। उन्होंने बीजेपी के नेताओं से सवाल पूछा कि अगर बीजेपी महिलाओं की इतनी ज्यादा हितैषी है तो क्यों नहीं नगर निगम पंचकूला एवं नगर निगम सोनीपत में मेयर पद के लिए महिलाओ को उम्मीदवार बनाया। पंचकूला में बीजेपी के पास रंजीता मेहता जैसा सशक्त महिला चेहरा था जो पंजाबी समुदाय से आती है। उसको मेयर का उम्मीदवार बनाया जा सकता था। सिहाग एवं किरण पूनिया ने कहा कि बीजेपी का महिला विरोधी चेहरा 28 अप्रैल को सबके सामने आ गया जब खुद प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दो सिटिंग महिला पार्षदों वार्ड नंबर 3 से रितु गोयल एवं वार्ड नंबर 4 से सोनिया सूद को उनके घर जाकर दबाव देकर उनका नामांकन पत्र दो पुरुष उम्मीदवारों के पक्ष में वापिस करवाया जबकि वो दोनों महिला इस बार भी अपने अपने वार्ड में काफी मजबूत स्थिती में थी। अगर बीजेपी के नेताओं में वास्तव में महिलाओं के प्रति सम्मान था तथा वो वास्तव में उनको सशक्त करना चाहते हैं तो इन दोनों महिलाओं को पूरा दबाव बना कर क्यों बिठाया ? जहां 28 अप्रैल की सुबह बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने पिछली बार रही पार्षद उम्मीदवारों के पर्चे वापिस कराकर दोनों महिलाओ के हकों पर कुठाराघात किया वही शाम को शहर में महिलाओं के हक एवं उनके सशक्तिकरण के लिए मशाल जलूस निकाल कर विपक्ष के खिलाफ नारे लगा कर महिला हितैषी होने का ढोंग रचना क्या बीजेपी के नेताओं के दोहरे चरित्र का प्रमाण नहीं ? सिहाग एवं किरण पूनिया ने कहा कि बीजेपी के नेताओ के कथन हाथी के दांतों की तरह है- खाने के और दिखाने के और।

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