राष्ट्रीय लोक अदालत में चंडीगढ़ में 19 हजार से अधिक मामलों का निपटारा

सुमेश कुमार /रमोला न्यूज़

चण्डीगढ़,: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान तथा माननीय श्री न्यायमूर्ति शील नागू, मुख्य न्यायाधीश-सह-प्रधान संरक्षक, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, यू.टी. चंडीगढ़ एवं माननीय श्री न्यायमूर्ति हरसिमरन सिंह सेठी, कार्यकारी अध्यक्ष, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, यू.टी. चंडीगढ़ के कुशल मार्गदर्शन में जिला न्यायालय परिसर, सेक्टर-43, चंडीगढ़ में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, यू.टी. चंडीगढ़ एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, यू.टी. चंडीगढ़ द्वारा किया गया।

जिला न्यायालय, सेक्टर-43, चंडीगढ़ में सेवारत न्यायिक अधिकारियों की अध्यक्षता में कुल 13 बेंचों का गठन किया गया। इन बेंचों में आपराधिक समझौतायोग्य मामले, परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के मामले, बैंक वसूली मामले, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण मामले, वैवाहिक विवाद, श्रम विवाद, मध्यस्थता मामले, अन्य दीवानी मामले, नगर निगम से संबंधित मामले तथा यातायात चालानों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया।

आज आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में वाद पूर्व मामलों, लंबित मामलों एवं यातायात चालानों सहित 19,004 से अधिक मामलों का निपटारा किया गया। इन मामलों में कुल ₹14,25,45,851/- की राशि का समझौता हुआ।

नियमित बेंचों एवं स्थायी लोक अदालत (जन उपयोगिता सेवाएं) द्वारा 10,595 वाद पूर्व मामलों का निपटारा किया गया, जिनमें ₹6,95,238/- की राशि शामिल रही। श्रम न्यायालय द्वारा 17 श्रम विवाद मामलों का निपटारा किया गया, जिनमें ₹20,01,292/- की राशि शामिल थी। राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोग, चंडीगढ़ द्वारा 63 मामलों का निपटारा किया गया, जिनमें ₹5,46,79,842/- की राशि शामिल रही, जबकि ऋण वसूली अधिकरण-II, चंडीगढ़ द्वारा 26 मामलों का निपटारा किया गया, जिनमें ₹9,71,48,285/- की राशि शामिल थी। इसके अतिरिक्त तहसीलदार (राजस्व), यू.टी. चंडीगढ़ द्वारा कुल 2102 इंतकालों का निपटारा किया गया।

श्री पुनीत मोहन शर्मा, माननीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, चंडीगढ़ की बेंच के समक्ष लंबित एक वैवाहिक विवाद मामले में माननीय श्री न्यायमूर्ति हरसिमरन सिंह सेठी, कार्यकारी अध्यक्ष, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, यू.टी. चंडीगढ़ द्वारा स्थायी समाधान हेतु विशेष प्रयास किए गए। पक्षकारों के साथ लंबा संवाद किया गया। माननीय न्यायमूर्ति ने कहा कि वैवाहिक विवादों में सबसे अधिक प्रभावित बच्चे होते हैं, इसलिए नाबालिग बच्चे का कल्याण सर्वोपरि होना चाहिए। पक्षकारों ने सौहार्दपूर्ण समाधान हेतु समय मांगा।

माननीय श्री न्यायमूर्ति हरसिमरन सिंह सेठी ने आमजन के बीच बैठकर उनसे संवाद भी किया तथा कहा कि लोगों को अपनी वास्तविक समस्याएं न्यायाधीशों के समक्ष रखने में संकोच नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में न्यायाधीशों को आम व्यक्ति की तरह व्यवहार करना चाहिए।

राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रयासों से चार मामलों में पक्षकारों ने अपने मतभेद भुलाकर पुनः साथ रहने का निर्णय लिया। साथ ही 10 वर्ष से अधिक पुराने एक मामले का भी निपटारा किया गया।

आज की राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन माननीय श्री न्यायमूर्ति हरसिमरन सिंह सेठी, कार्यकारी अध्यक्ष, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, यू.टी. चंडीगढ़ के कुशल मार्गदर्शन में किया गया। गांधीवादी सिद्धांतों से प्रेरित लोक अदालतें आज त्वरित एवं सुलभ न्याय प्रदान करने का एक प्रभावी माध्यम बन चुकी हैं।

श्री एच.एस. ग्रेवाल, माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, श्री अरुण कुमार अग्रवाल, माननीय सदस्य सचिव, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, यू.टी. चंडीगढ़ तथा श्री सुनील कुमार, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चंडीगढ़ ने राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के लिए सभी संबंधित पक्षों का आभार व्यक्त किया तथा आमजन से लोक अदालतों के माध्यम से अपने विवादों का त्वरित एवं किफायती समाधान कराने की अपील की।

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