बारात के साथ आए सेम मुखेम नागराजा के ढोल को ग्रामीणों ने आस्था और सम्मान के साथ स्वागत किया।

सुरेंद्र चन्द रमोला/ रमोला न्यूज़

चिन्यालीसौड़ : भंडारस्यु पट्टी के मकोरा गांव में उस समय श्रद्धा और उत्साह का माहौल बन गया, जब सिलारी गांव से आई रमोला लोगों की बारात के साथ सेम मुखेम नागराजा के पवित्र ढोल भी पहुंचे। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और लोक संस्कृति की झलक ने पूरे विवाह समारोह को खास बना दिया।
जानकारी के अनुसार, प्रतापनगर के सिलारी गांव से बारात मकोरा गांव पहुंची थी। बारात के साथ आए सेम मुखेम नागराजा के ढोल को ग्रामीणों ने आस्था और सम्मान के साथ स्वागत किया। विवाह समारोह के दौरान ढोल की मंगल ध्वनि के बीच दूल्हा-दुल्हन को नागराजा का आशीर्वाद दिया गया।
ग्रामीणों का मानना है कि सेम नागराजा के ढोल शुभता, समृद्धि और सुख-शांति का प्रतीक हैं। विवाह जैसे मांगलिक अवसरों पर इनकी उपस्थिति को बेहद शुभ माना जाता है। ढोल की थाप पर बारातियों और ग्रामीणों ने पारंपरिक लोकनृत्य भी किया, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय और सांस्कृतिक रंग में रंग गया।
स्थानीय लोगों ने कहा कि आधुनिक दौर में भी क्षेत्र की लोक परंपराएं और धार्मिक आस्थाएं जीवित हैं, जो नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का काम कर रही हैं। समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे।

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