तिलक चंद रमोला / रमोला न्यूज़
नौगांव:उत्तरकाशी जनपद के नौगांव विकासखंड स्थित कण्डारी गांव में विद्यालयी अवकाश के दौरान बच्चों और एक शिक्षक की अनूठी पहल ने गांव के पारम्परिक धारे को नया जीवन दे दिया। पर्यावरण संरक्षण एवं जल स्रोतों के संवर्धन की दिशा में किए गए इस सराहनीय प्रयास की क्षेत्रभर में प्रशंसा हो रही है।
पर्यावरण प्रेमी विधालय के शिक्षक सुरक्षा रावत के मार्गदर्शन में गांव के बच्चों ने कई दिनों तक श्रमदान कर पुराने धारे की साफ-सफाई, पुनर्निर्माण एवं सौंदर्यीकरण का कार्य किया। बच्चों ने धारे के आसपास स्वच्छता अभियान चलाने के साथ वृक्षारोपण भी किया। वहीं धारा पूजा एवं उत्तराखंड की पारम्परिक लोक कला ऐपण से धारे को सजाकर उसे सांस्कृतिक पहचान भी दी गई। अब यह धारा गांव में आकर्षण का केंद्र बन गया है।
अभियान में स्थानीय राजकीय प्राथमिक विद्यालय एवं राजकीय इंटर कॉलेज कण्डारी के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। प्रमुख रूप से सिमरन, अंशिका, ऋषिका, रिया, साक्षी, अंशुल, शिवांश, किशन, ऋषभ, हर्ष, वैष्णवी, जानवी, शिवन्या एवं श्रुति सहित अन्य बच्चों ने श्रमदान कर इस कार्य को सफल बनाया। स्थानीय निवासी सुभाष गौड़ एवं सोहनलाल का सहयोग भी उल्लेखनीय रहा।
विशेष बात यह रही कि गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी छात्रा रिया ने अपने जन्मदिवस के अवसर पर धारे के आसपास पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
सुरक्षा रावत ने बच्चों के उत्साह, समर्पण एवं सामूहिक प्रयास की सराहना करते हुए उन्हें “जल नायक” की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय जल स्रोत केवल पानी का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परम्परा और आने वाली पीढ़ियों की धरोहर हैं।
उन्होंने बताया कि “कल के लिए जल अभियान” के अंतर्गत भविष्य में अन्य गांवों में भी इस प्रकार के जनसहभागिता आधारित अभियान चलाए जाएंगे, ताकि पारम्परिक जल स्रोतों के संरक्षण के साथ-साथ नई पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ा जा सके।
