विश्व में अमेरिका की गिरती साख

आज विश्व परिवेश में घटना क्रम बहुत तेजी से बदल रहा है | डॉलर की अहमियत घट रही हैI अमेरिका मे ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद से अमेरिका निरंतर हर मीडिया प्लेटफार्म मे सुर्खिया बटोर रहा है; किसी उपलब्धि के कारण नहीं, बल्कि ट्रम्प द्वारा लिए जा रहे निर्णय के कारण | अमेरिका इस वक्त 37 ट्रिलियन डॉलर के क़र्ज़ के नीचे है जो उसकी जी डी पी से ज्यादा है ,जो अमेरिका की गिरती अर्थव्वस्था का संकेत है |
डॉलर की अन्धाधुन छपाई जिसका कोई आर्थिक आधार नहीं था ,पुरे विश्व पर दादागिरी का लोभ, अपने फायदे के लिए किसी भी देश को बर्बाद करने की सनक, आज यूनाइटेड नेशन के आदेश विश्व के सभी देशो के लिए है (सिर्फ अमेरिका को छोड़ कर )आज महत्वहीन हो चुके है| इसका मुख्य कारण है “ यूनाइटेड स्टेट ऑफ़ अमेरिका“|
आज विश्व, डॉलर की मोनोपोली तोडना चाहता है और अमेरिका इसे रोकना | पर अब सारे देश अमेरिका के डॉलर के खेल को समझ चुके है |अमेरिका का राष्ट्रपति उनके इतिहास का सबसे सनकी राष्ट्रपति है| उसकी स्टेटमेंट हर रोज बदलती रहती है, यह कोई प्रयोग तो नहीं? विचारणीय विचार यह भी है |
राष्ट्रपति बनने के पश्चात उसने जिस तरह कनाडा और ग्रीनलैंड को लेकर जो ट्रम्प ने बयान दिए उससे अमेरिका के संबंध कनाडा और डेनमार्क से आज के दिन के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे है| उन्होंने नेटो को भी साफ़ शब्दों में कह दिया है की अमेरिका अब अकेले नाटो के ख़र्चे नहीं वहन नही करेगा| अमेरिका के इस डिसिशन से सारे नाटो देश सकते मे आ गए और आप सब को पता है की नाटो देश अब ख़र्चे वहन करने लग गए है पर अमेरिका से सबके संबंध काफी बदतर हो चुके है|
विश्व के सभी देश पहले काफी परेशान रहे वोह तो भला हो अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट का उसने इसे गलत माना और यह भी कहाँ की जिन देशो से टेर्रिफ के पैसे लिए है उन्हें लोटा देने को आर्डर कर दिया है | भारत को अमेरिका ने इस दौरान रूस से क्रूड आयल लेने से मना किया और भारत-अमेरिका बिज़नेस डील में कृषि,डेरी प्रोडक्ट इन्क्लुड़ करने का दवाब डाला परन्तु भारत ने इसके लिए मना कर दिया जिससे अमेरिकन एडमिनिस्ट्रेशन काफी नाराज हुआ और ट्रम्प ने भारत पर टैरिफ लगा दिया जिससे अमेरिका की भारत से बिज़नस डील खटाई मे पड़ गई और अब तक डील नहीं हुई है; और यह शुभ संकेत नहीं है |
अमेरिका ने भारत पर टैरिफ लगाने की धमकी दी और उसे चरितार्थ भी किया पर भारत के मजबूत स्टैंड के कारण अंत में यह लड़ाई भी अमेरिका हार गया |इन सब कारस्तानी के बाद ट्रम्प समझ गया की भारत के प्रधानमंत्री काफी नाराज है,अमेरिकन विदेशमंत्री का हाल का भारत दौरा ईसी नाराजगी को दूर करने का प्रयास था ,पर भारत ने अमेरिका को साफ़-साफ़ बता दिया की भारत अपने राष्ट्रिय हित के साथ कोई समझोता नहीं करेगा |
आज ट्रम्प के व्यवहार ने अमेरिका को विश्व में अकेला कर दिया है | आज चाहे कनाडा हो या फ्रांस; ब्राज़ील हो या साउथ अफ्रीका ; चाइना हो या भारत ; टर्की हो या अजरबैजान; जर्मनी हो या इटली ,जिस देश का आप नाम ले आज किसी ना किसी कारण अमेरिका से उसके संबंध खटास से भरे है कारण सिर्फ एक इंसान है तो वोह है अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सूत्रों के हिसाब से
ट्रम्प ने भारत पर दवाब डालने हेतु बांग्लादेश ,नेपाल और पाकिस्तान में सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी से सत्ता परिवर्तन करवाया और उसे नाम दिया गया “जेन जी आन्दोलन “
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन का कारण था वहां की नेता शेख हसीना ने अपना एक टापू “संत मार्टिन आइलैंड “ अमेरिका को देने से इनकार कर दिया जो अमेरिका अपने लिए चाहता था ताकि वहाँ मिलिट्री बेस बना सके ताकि चीन और भारत पर नजदीक से नजर रख सके | बांग्लादेश में तख्ता पलटने में अमेरिका कामयाब रहा पर अभी संत मार्टिन आइलैंड का सपना पूरा ना कर सका |शेख हसीना को भारत ने शरण दी जिस कारण उनकी जान बच सकी |
नेपाल मे आन्दोलन सफल रहा और अमेरिका कम्युनिस्ट सरकार को सत्ता से बेदखल करने मे सफल रहा जिससे चीन का प्रभाव नेपाल पर बहुत कम हो गया | जहाँ तक पाकिस्तान का सवाल है इमरान खान की शुरू से अमेरिका से नहीं बनी, इमरान ने रूस से नजदीकियां बढ़ाने की भरपूर कोशिश की लेकिन रूस भारत के साथ अपने रिश्ते पर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता था इस कारण इमरान का यह प्रयास विफल रहा और अमेरिका ने इमरान सरकार को हटा कर शाहबाज खान की सरकार फ़ौज की सहायता से काबिज करा दी पर भारत पर कोई प्रभाव डालने में अमेरिका विफल रहा |
मजबूत भारत सरकार और मोदी जी की लोकप्रियता प्रमुख कारण थी| आज भारत विश्व की सबसे तेज बढती अर्थव्यवस्था है| सूत्रों के हिसाब से 25 करोड़ लोगो को मोदी सरकार ने गरीबी रेखा से बाहर निकाला है जो बहुत बड़ी अचीवमेंट है |
,आज के दिन अमेरिका ईरान के साथ युद्ध में बुरी तरह फंस चूका है, इजरायल युद्ध निपटाना चाहता है जबकि अमेरिका रोकना| पर होगा क्या? यह तो भविष्य के गर्भं में छिपा है | और हां,एक बात ध्यान देने योग्य है की मिस्टर ट्रम्प की जबान रूकती ही नहीं सूत्रों के हिसाब से ट्रम्प की स्टेटमेंट शुक्रवार को ईरान युद्ध पर कुछ और होती है और सोमवार को कुछ और, लेकिन इन स्टेटमेंट से स्टॉक मार्किट में उछाल और फिर गिरावट क्यों हो जाती है ऐसा क्यों? क्या इसमें भी अमेरिका का खेल है?

लेखक : राकेश शर्मा
भूराजनीतिक विश्लेषक (Geopolitical Analyst)

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