शिक्षा को डिग्री से आगे ले जाकर प्रतिभा, कौशल और अवसरों से जोड़ना जरूरी : महिपाल ढांडा

 

प्रीति कंबोज 

रमोला न्यूज़ ब्यूरो

चंडीगढ़, 23 सितंबर। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे की प्रतिभा को पहचानना, उसके कौशल का विकास करना और उसे आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना होना चाहिए। यह बात हरियाणा के स्कूल एवं उच्च शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने बुधवार को आयोजित सीआईआई चंडीगढ़ एजुकेशन समिट 2026 को संबोधित करते हुए कही।

महिपाल ढांडा ने स्कूलों, विश्वविद्यालयों, उद्योग और समाज के बीच अधिक मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भारत के युवाओं को ऐसे कौशल और क्षमताओं से लैस किया जाना चाहिए, जिससे वे विकसित भारत के निर्माण में सार्थक योगदान दे सकें। उन्होंने शिक्षा एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से अपने सुझाव साझा करने तथा सरकार के साथ मिलकर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का आह्वान किया।

ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर, चंडीगढ़ अल्बा स्मेरिग्लियो ने कहा कि ग्रेटर चंडीगढ़ क्षेत्र में शिक्षा, कौशल और उद्योग को जोड़कर एक मॉडल विकसित करने की पूरी क्षमता है। सरकार, शिक्षण संस्थानों और उद्योगों को एक साथ लाकर युवाओं में भविष्य के लिए जरूरी कौशल, रचनात्मकता और अनुकूलन क्षमता विकसित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन इस दिशा में भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदार के रूप में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

सीआईआई चंडीगढ़ एजुकेशन समिट 2026 के चेयरमैन एवं सतलुज ग्रुप ऑफ स्कूल्स के प्रबंध निदेशक रीकृत सराय ने कहा कि भविष्य कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसमें हमारे बच्चे एक दिन प्रवेश करेंगे, बल्कि आज हम अपने कक्षाओं, संस्थानों और वर्तमान निर्णयों के माध्यम से उनके भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ग्रेटर चंडीगढ़ को एक प्रमुख शिक्षा एवं ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित होने के लिए सभी आवश्यक संभावनाएं मौजूद हैं। विशेष रूप से पंचकूला में उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनने की क्षमता है, जहां देश-विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों तथा ब्रिटिश संस्थानों को आकर्षित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को युवाओं को केवल आज की नौकरियों के लिए तैयार करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें भविष्य की दुनिया में सोचने, बदलाव के अनुरूप ढलने, सृजन करने और नेतृत्व करने के लिए सक्षम बनाना चाहिए।

सीआईआई चंडीगढ़ यूटी के चेयरमैन एवं स्प्रे इंजीनियरिंग डिवाइसेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक विवेक वर्मा ने शिक्षा पर प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक और उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के कारण शिक्षा व्यवस्था तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। तकनीक व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप शिक्षा, बेहतर पहुंच तथा शिक्षण और मूल्यांकन के नए तरीकों को सक्षम बना सकती है, लेकिन इसे शिक्षा में मानवीय तत्व के विकल्प के बजाय सहायक के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

समिट में स्कूल से कौशल और कौशल से उद्योग तक मजबूत संपर्क स्थापित करने, अनुभव आधारित एवं व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने, शिक्षकों के विकास को मजबूत करने, उभरती तकनीकों को शिक्षा में शामिल करने तथा विद्यार्थियों को उद्योग जगत से अधिक परिचित कराने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

समिट में शिक्षा जगत और संस्थागत क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान स्कूलों, उच्च शिक्षण संस्थानों, नीति-निर्माताओं और उद्योग के बीच समन्वय बढ़ाकर तेजी से बदलती कार्यक्षेत्र एवं सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था तैयार करने पर विचार-विमर्श किया गया।

प्रतिनिधियों ने सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि शिक्षा बदलती रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप बनी रहे और साथ ही युवाओं की बौद्धिक, सामाजिक एवं मानवीय क्षमताओं का भी समग्र विकास हो।

समिट के माध्यम से सीआईआई चंडीगढ़ ने शिक्षा के क्षेत्र में उद्योग आधारित संवाद को आगे बढ़ाने तथा भविष्य के लिए तैयार, समावेशी और कौशल आधारित शिक्षा व्यवस्था के विकास में सहयोग देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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