कोमल रमोला
रमोला न्यूज़ ब्यूरो
पिंजौर, 25 अक्टूबर
जीरकपुर-परवाणू नेशनल हाईवे-5 पर स्थित चंडीमंदिर टोल प्लाजा अब आम जनता और मुसाफिरों के लिए सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बनता जा रहा है। रोजाना लगने वाले लंबे जाम, आपातकालीन एंबुलेंस के फंसने और स्थानीय निवासियों को टोल पास संबंधी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। इन अव्यवस्थाओं के खिलाफ अब कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष एवं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव विजय बंसल एडवोकेट ने चंडीमंदिर टोल प्लाजा की व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और टोल संचालन कंपनी मैसर्स क्लाउडन्यू हाईवेज को दीपांशु बंसल एडवोकेट के माध्यम से लीगल नोटिस भेजा है। नोटिस में 30 अक्टूबर 2026 तक व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी गई है कि मांगें पूरी नहीं होने पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
विजय बंसल ने आरोप लगाया कि चंडीगढ़ ट्राइसिटी के साथ पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण हाईवे पर टोल व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित हो चुकी है। उनके अनुसार, इस मार्ग पर रोजाना करीब 50 से 52 हजार वाहनों की आवाजाही होती है, जबकि सप्ताहांत में वाहनों की संख्या 60 हजार के पार पहुंच जाती है। इसके बावजूद टोल प्लाजा पर पर्याप्त यातायात प्रबंधन नहीं होने के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नई कंपनी के संचालन के बाद बढ़ी जाम की समस्या
विजय बंसल ने आरोप लगाया कि नई टोल कंपनी के संचालन के बाद टोल प्लाजा पर कर्मचारियों की संख्या कम कर दी गई है। पहले पुरानी कंपनी के पास करीब 50 कर्मचारी कार्यरत थे, लेकिन नई कंपनी द्वारा कर्मचारियों की संख्या घटाए जाने से कई लेन बंद रहती हैं। इसके चलते टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं और यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित नहीं हो पा रही।
उन्होंने कहा कि वाहन चालकों को टोल पार करने के लिए आधे से एक घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे लोगों का कीमती समय बर्बाद हो रहा है। सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है, जब आपातकालीन एंबुलेंस और अन्य जरूरी सेवाओं के वाहन जाम में फंस जाते हैं। ऐसे में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में बाधा आने का खतरा बना रहता है।
इमरजेंसी लेन चौड़ी करने की मांग
विजय बंसल ने टोल प्लाजा के दोनों तरफ एक लेन को चौड़ा करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि मौजूदा लेन की चौड़ाई कम होने के कारण वाहनों को आवागमन में परेशानी होती है। यदि दोनों तरफ एक लेन को थोड़ा और चौड़ा किया जाए, तो एंबुलेंस, वीआईपी वाहनों, सरकारी वाहनों तथा मासिक और वार्षिक टोल पास वाले स्थानीय वाहनों को निकलने में आसानी होगी। इससे सामान्य टोल लेनों पर यातायात का दबाव भी कम किया जा सकेगा।
100 मीटर कतार के नियम पर उठाए सवाल
विजय बंसल ने आरोप लगाया कि टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतारें लगने के बावजूद निर्धारित नियमों का प्रभावी पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने एनएचएआई के 100 मीटर लंबी कतार संबंधी नियम का हवाला देते हुए कहा कि निर्धारित परिस्थितियों में वाहनों को बिना टोल दिए निकालने का प्रावधान होने के बावजूद इसका पालन नहीं हो रहा।
उनके अनुसार, नियमों की अनदेखी के कारण वाहन चालकों को लंबे समय तक कतारों में खड़ा रहना पड़ता है और लोगों में टोल प्रबंधन के प्रति रोष बढ़ रहा है।
स्थानीय निवासियों को तीन महीने का पास देने पर आपत्ति
लीगल नोटिस में स्थानीय निवासियों के टोल पास की वैधता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। विजय बंसल ने आरोप लगाया कि हाई कोर्ट के आदेशों के विपरीत स्थानीय लोगों को एक साल की वैधता वाला पास देने के बजाय केवल तीन महीने की अवधि का पास दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय निवासियों को बार-बार अपना पास रिन्यू करवाने के लिए टोल प्लाजा के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों को राहत देने के बजाय उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
विजय बंसल ने मांग की कि स्थानीय निवासियों के टोल पास की एक साल की वैधता बहाल की जाए और पास रिन्यूअल की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए, ताकि लोगों को बार-बार टोल प्लाजा जाने की जरूरत न पड़े।
ऑनलाइन रिन्यूअल और यूपीआई भुगतान की सुविधा बंद होने से बढ़ी परेशानी
विजय बंसल ने आरोप लगाया कि टोल पास के ऑटोमैटिक फास्टैग कटौती और गूगल पे तथा यूपीआई के माध्यम से ऑनलाइन रिन्यूअल की सुविधा बंद होने से स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
उन्होंने कहा कि टोल प्लाजा पर मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने के कारण यूपीआई भुगतान भी कई बार असफल हो जाता है। ऐसे में वाहन चालकों को भुगतान और पास रिन्यूअल के लिए लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है।
उन्होंने मांग की कि ऑनलाइन रिन्यूअल और डिजिटल भुगतान की सुविधा दोबारा शुरू की जाए। साथ ही टोल प्लाजा पर हैंड-हेल्ड स्कैनर उपलब्ध करवाए जाएं, ताकि स्थानीय निवासियों और पास धारकों के वाहनों की जांच तेजी से हो सके और उन्हें अनावश्यक रूप से कतारों में न खड़ा होना पड़े।
तीन चरणों वाला जाम समाधान प्लान भी नहीं हुआ प्रभावी
विजय बंसल ने कहा कि टोल प्लाजा पर जाम की समस्या को दूर करने के लिए प्रशासन और टोल प्रबंधन की ओर से तैयार किया गया तीन चरणों वाला प्लान भी प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाया है। उनके अनुसार, न तो इमरजेंसी लेन को चौड़ा किया गया और न ही सिग्नल लाइटों के पास जिग-जैग लेन विकसित की गई।
उन्होंने कहा कि करनाल की तर्ज पर फ्री-फ्लो मल्टी-लेन टोलिंग सिस्टम लागू करने का आश्वासन भी समय सीमा बीतने के बावजूद पूरा नहीं हुआ। इससे यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए किए गए वादे अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाए हैं।
30 अक्टूबर तक सुधार नहीं हुआ तो हाई कोर्ट जाएंगे
विजय बंसल एडवोकेट ने एनएचएआई और टोल कंपनी को भेजे लीगल नोटिस में 30 अक्टूबर 2026 तक टोल प्लाजा की व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने मांग की है कि स्थानीय निवासियों के टोल पास की एक साल की वैधता बहाल की जाए, ऑनलाइन रिन्यूअल और भुगतान की सुविधा शुरू की जाए, टोल प्लाजा पर हैंड-हेल्ड स्कैनर उपलब्ध करवाए जाएं तथा यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए पर्याप्त ट्रैफिक मार्शल तैनात किए जाएं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय के भीतर व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया और स्थानीय निवासियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो इस मामले को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में उठाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर अवमानना याचिका और जनहित याचिका (PIL) भी दायर की जाएगी।
विजय बंसल ने कहा कि चंडीमंदिर टोल प्लाजा क्षेत्र की महत्वपूर्ण यातायात कड़ी है, जहां से रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में टोल व्यवस्था में पारदर्शिता, नियमों का पालन और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाना एनएचएआई तथा टोल कंपनी की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम जनता और स्थानीय निवासियों को जाम तथा टोल संबंधी परेशानियों से राहत दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखी जाएगी।
