सुरेंद्र सिंह /रमोला न्यूज़
पिंजौर:
ज्यूडिशियल कॉम्प्लेक्स और मिनी सचिवालय के निर्माण को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अब केंद्र सरकार को व हाईकोर्ट को अगली सुनवाई पर पक्ष रखने का आदेश दिया है। इससे पहले हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि ज्यूडिशियल कॉम्प्लेक्स के लिए जहां 7.94 एकड़ तो वहीं लघु सचिवालय के लिए 10.26 एकड़ भूमि अलॉट की गई है। साथ ही प्रदेश सरकार ने बताया कि अपने हिस्से की राशि जमा करवा दी है और केंद्र का हिस्सा आना अभी बाकी है।
शिवालिक विकास मंच के प्रदेश अध्यक्ष विजय बंसल ने एडवोकेट दीपांशु बंसल और सजल बंसल के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए लोगों की सहूलियत के लिए एक ही छत के नीचे सभी कार्यालयों को लाने के लिए लघु सचिवालय और प्रस्तावित ज्यूडिशियल कांप्लेक्स का निर्माण न होने के चलते हाईकोर्ट की शरण ली थी। एचएसवीपी ने जवाब दाखिल करते हुए बताया है कि ज्यूडिशियल कॉम्प्लेक्स और आवासीय परिसर के लिए 7.94 एकड़ भूमि अलॉट की गई है। लघु सचिवालय व अधिकारियों के आवास के लिए 10.26 एकड़ जमीन अलॉट की गई है। इससे पहले गृह एवं जेल विभाग द्वारा पॉलिसी अनुसार 25 प्रतिशत राशि जमा न करवाने के चलते अलॉटमेंट रद्द कर दी गई थी। 28 मार्च 2024 को रिवाइज्ड डिमार्केशन प्लान मंजूर किया गया है। हालांकि एचएसवीपी ने इमारतों के निर्माण को उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर बताया। 2013 में अस्थाई रूप से ही कालका मंडी में कोर्ट चल रही है। प्रमुख रूप से कालका में अस्थाई रूप से कार्यरत न्यायिक परिसर में न तो लॉयर्स चैंबर्स हैं और न ही लिटिगेंट हाल। परिसर में बार रूम, लाइब्रेरी और सही पार्किंग तक नहीं है। वीरवार को हरियाणा सरकार ने बताया कि इस निर्माझा के लिए राज्य व केंद्र सरकार को मिलकर फंड देना है। राज्य सरकार अपना हिस्सा दे चुकी है और केंद्र का हिस्सा आना अभी बाकी है। ऐसे में अब हाईकोर्ट ने केंद्र व हाईकोर्ट को अगली सुनवाई पर पक्ष रखने का आदेश दिया है।
