*पंचकूला में कमल खिलाकर विपुल गोयल ने साबित की संगठन क्षमता*
चन्द्र शेखर धरणी/ रमोला न्यूज़
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार में निकाय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता विपुल गोयल ने अपनी राजनीतिक कुशलता, संगठन क्षमता और नेतृत्व परिपक्वता के बल पर पंचकूला नगर निगम चुनाव में भाजपा को उल्लेखनीय सफलता दिलाकर प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान स्थापित कर दी है। पंचकूला जैसे नए राजनीतिक क्षेत्र में जाकर चुनावी कमान संभालना और वहां पार्टी को मजबूत जीत दिलाना उनके लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था, लेकिन उन्होंने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया।
हरियाणा की वैश्य समाज की राजनीति में लंबे समय बाद ऐसा नेतृत्व उभरकर सामने आया है जिसे प्रांत स्तर पर स्वीकार्यता मिल रही है। वरिष्ठ नेताओं बी डी गुप्ता और मांगे राम गुप्ता के बाद अब वैश्य समाज को विपुल गोयल के रूप में एक प्रभावशाली राजनीतिक चेहरा मिलता दिखाई दे रहा है। शांत स्वभाव, मधुर व्यवहार और संतुलित राजनीतिक शैली उनकी सबसे बड़ी विशेषता मानी जाती है। राजनीतिक जीवन में आक्रामक बयानबाजी से दूर रहकर संगठनात्मक कार्यशैली के माध्यम से अपनी पहचान बनाना उनकी कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण पहलू रहा है।
गौरतलब है कि हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल को पंचकूला नगर निगम चुनाव का प्रभारी नियुक्त किया गया था। चुनाव के दौरान उन्होंने लगभग एक माह तक लगातार पंचकूला में रहकर संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और बूथ स्तर तक रणनीति लागू करने में पूरा समय दिया। दिन-रात मेहनत करते हुए उन्होंने चुनावी समीकरणों को भाजपा के पक्ष में मोड़ दिया। परिणामस्वरूप भाजपा ने न केवल निगम चुनाव में जीत दर्ज की, बल्कि भारी मार्जिन से राजनीतिक बढ़त भी हासिल की।
इस चुनाव ने विपुल गोयल को वैश्य समाज के एक सशक्त नेता के रूप में भी स्थापित किया है। पंचकूला में वैश्य समाज का प्रभावशाली वोट बैंक माना जाता है। यहां से पूर्व मेयर कुलभूषण गोयल रहे हैं, जबकि दो बार विधायक और पूर्व विधानसभा स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता भी पंचकूला की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। ऐसे राजनीतिक माहौल में भाजपा को संगठित रखते हुए विजय दिलाना विपुल गोयल की रणनीतिक क्षमता को दर्शाता है।
उल्लेखनीय बात यह भी है कि पंचकूला विपुल गोयल के लिए पूरी तरह नया राजनीतिक क्षेत्र था। वह मूल रूप से फरीदाबाद की राजनीति से जुड़े रहे हैं और वहीं से विधायक भी रहे हैं। हरियाणा के दूसरे छोर पर स्थित पंचकूला में जाकर संगठन संभालना और स्थानीय समीकरणों को समझते हुए पार्टी को जीत दिलाना आसान कार्य नहीं था। लेकिन उन्होंने यह साबित किया कि मजबूत संगठन कौशल और राजनीतिक अनुभव के दम पर किसी भी क्षेत्र में प्रभाव स्थापित किया जा सकता है।
फरीदाबाद की राजनीति में भी विपुल गोयल अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान रखते हैं। कई बार विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने संगठन के प्रति निष्ठा बनाए रखी। वर्ष 2019 में भाजपा से टिकट न मिलने के बाद भी उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी और लगातार मेहनत करते रहे। यही कारण है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व, विशेषकर अमित शाह के करीबी नेताओं में उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
पंचकूला निगम चुनाव में मिली सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विपुल गोयल केवल प्रशासनिक मंत्री ही नहीं, बल्कि जमीनी राजनीति को समझने वाले कुशल संगठनकर्ता भी हैं। लगातार मेहनत, कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल और चुनावी रणनीति के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व के सामने अपनी राजनीतिक क्षमता का मजबूत प्रदर्शन किया है।
