रोमी सिंह /रमोला न्यूज़
पंचकुला। प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्वदेशी’ के आह्वाvन पर आज पंचकुला में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता उत्तर भारत प्रांत संयोजक डॉ. राजेश गोयल ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और स्वदेशी ऊर्जा संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देना रहा।
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. राजेश गोयल ने कहा कि “विचार वैश्विक हों, व्यवहार स्वदेशी हो और लक्ष्य राष्ट्रहित हो” के मंत्र को अपनाकर ही हम भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में स्वावलम्बी बना सकते हैं। उन्होंने आज की जीवनशैली में ऊर्जा के अत्यधिक उपभोग और विदेशी आयात पर निर्भरता को देश के आर्थिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बताया।
बैठक में ‘स्वदेशी जागरण मंच’ द्वारा तैयार किए गए एक विशेष चार्ट के माध्यम से ऊर्जा संसाधनों के तीन चरणों पर विस्तृत चर्चा की गई:
अतीत (कल): प्रकृति आधारित ऊर्जा का युग, जिसमें लकड़ी, उपले, गोबर गैस, बैल व पशु शक्ति, और जल चक्की जैसी प्राकृतिक और कम प्रदूषणकारी व्यवस्थाएं शामिल थीं।
वर्तमान (आज): अत्यधिक उपभोग और आयात निर्भरता का युग, जिसमें पेट्रोल, डीजल, कोयला और भारी बिजली उपकरणों के बढ़ते उपयोग से वायु प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और आर्थिक बोझ जैसी समस्याएं पैदा हो रही हैं।
भविष्य (आने वाला कल): स्वदेशी और आत्मनिर्भर ऊर्जा का युग, जिसमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोगैस, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन को भविष्य की चाबी बताया गया।
बैठक में लिए गए मुख्य संकल्प और सरल उपाय:
गैर-ज़रूरी बिजली उपकरणों को तुरंत बंद करने की आदत डालें।
ऊर्जा की बचत करने वाले (LED और स्टार-रेटेड) उपकरणों का ही चयन करें।
निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन, साइकिल या पैदल चलने की संस्कृति अपनाएं।
सौर ऊर्जा और सौर पंपों के प्रयोग को बढ़ावा दें।
पर्यावरण संतुलन के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाएं।
बैठक के अंत में सभी उपस्थित सदस्यों ने स्वदेशी ऊर्जा संसाधनों को अपनाने और “ऊर्जा बचाओ, भविष्य बचाओ” के संकल्प के साथ भारत को आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान देने की शपथ ली।
