रमोला न्यूज नौगांव: उत्तराखंड में आयुष विभाग के अंतर्गत कार्यरत चिकित्साधिकारियों ने अपनी वर्षों से लंबित सेवा संबंधी मांगों के निराकरण को लेकर चरणबद्ध आंदोलन शुरू कर दिया है।
उत्तरकाशी संगठन के जिलाध्यक्ष बिरेंन्द्र चंद ने बताया चिकित्साधिकारियों का आरोप है कि शासन एवं विभागीय स्तर पर उनकी समस्याओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है, जिससे पूरे चिकित्साधिकारी संवर्ग में व्यापक असंतोष और रोष व्याप्त है।
राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ के प्रांतीय आह्वान पर प्रदेशभर में आंदोलन की शुरुआत की गई है। संघ का कहना है कि कई बार पत्राचार, बैठकों एवं वार्ताओं के माध्यम से अपनी मांगों को शासन और विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस एवं संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया है।
संघ द्वारा घोषित आंदोलन कार्यक्रम के अनुसार 8 जून से 10 जून 2026 तक सभी चिकित्साधिकारी काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध दर्ज करते हुए ओपीडी का संचालन कर रहे हैं। 11 एवं 12 जून को आधे दिवस ओपीडी संचालित की जाएगी तथा शेष समय आंदोलनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 13 जून को पूर्ण ओपीडी बहिष्कार करते हुए जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं 15 जून से पूरे प्रदेश में पूर्ण कार्य बहिष्कार शुरू करते हुए आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवा निदेशालय, देहरादून में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
चिकित्साधिकारियों की प्रमुख मांगों में चिकित्सा संवर्ग हेतु विभागीय निदेशक की नियुक्ति, एसीआर समयबद्ध पूर्ण कर एसीपी/एमएसीपी का लाभ प्रदान करना, डीएसीपी लाभ लागू करना, विभागीय ढांचे का पुनर्गठन एवं पदोन्नति के अवसर बढ़ाना, सेवा अवधि के दौरान स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए तीन वर्ष का पूर्ण वेतन सहित अध्ययन अवकाश, वर्ष 2024 बैच के चिकित्साधिकारियों का स्थायीकरण तथा मोबाइल ऐप आधारित उपस्थिति एवं आधार आधारित बायोमेट्रिक व्यवस्था से उत्पन्न समस्याओं का समाधान शामिल हैं।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन एवं विभागीय अधिकारियों की होगी।
