विक्रांत शर्मा /रमोला न्यूज़
पंचकूला, 24 जून ।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं हरियाणा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष श्री ज्ञानचंद गुप्ता ने 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र और संविधान पर सबसे बड़ा आघात बताते हुए इसे स्वतंत्र भारत का सबसे काला अध्याय बताया।
उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 की मध्यरात्रि में आपातकाल की घोषणा के साथ ही देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया। डिफेंस ऑफ इंडिया रूल्स (DIR) तथा मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट (MISA) जैसे कठोर कानूनों के तहत विपक्ष के लाखों नेताओं, कार्यकर्ताओं और निर्दोष नागरिकों को बिना किसी सुनवाई के जेलों में बंद कर दिया गया। उन्हें अपील, दलील और न्याय पाने के अधिकार से भी वंचित कर दिया गया।
श्री गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ माने जाने वाले मीडिया पर भी कठोर सेंसरशिप लागू कर दी गई। समाचार पत्रों के प्रकाशन पर प्रतिबंध लगाए गए और हर समाचार को सरकारी अनुमति के बाद ही प्रकाशित करने की व्यवस्था की गई। उन्होंने कहा कि पंजाब के प्रसिद्ध समाचार पत्र पंजाब केसरी का बिजली कनेक्शन तक काट दिया गया, जिसके बावजूद अखबार ने ट्रैक्टर की सहायता से अपना प्रकाशन जारी रखा और उसके कई पृष्ठों पर केवल “CENSORED” लिखकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हुए प्रहार का विरोध दर्ज कराया।
उन्होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर चलाए गए नसबंदी अभियान में अनेक स्थानों पर जबरन नसबंदी कराई गई। लक्ष्य पूरे करने के दबाव में कई बार 16 से 18 वर्ष तक के अविवाहित युवाओं को भी इसका शिकार बनाया गया। साथ ही विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं के व्यापार एवं रोजगार को प्रभावित कर उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
श्री गुप्ता ने कहा कि आपातकाल का सबसे प्रभावी विरोध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवकों और लोकतंत्र समर्थक संगठनों ने किया, जिसके परिणामस्वरूप लाखों कार्यकर्ताओं को MISA और DIR जैसे कानूनों के तहत लगभग 18 महीने तक जेलों में रखा गया। कई परिवारों को अपने परिजनों से मिलने तक की अनुमति नहीं दी गई।
उन्होंने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के चुनाव को निरस्त किए जाने के बाद सत्ता में बने रहने के लिए आपातकाल लगाया गया, जिसने लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना को गहरी चोट पहुंचाई। यह ऐसा अध्याय है जिसे देश कभी नहीं भूल सकता।
श्री गुप्ता ने कहा कि जो लोग आज संविधान की रक्षा की बातें करते हैं, उन्हें पहले आपातकाल के उस दौर को याद करना चाहिए, जब सत्ता बचाने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों का दमन किया गया था। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को इस इतिहास से अवगत कराना आवश्यक है ताकि वे समझ सकें कि लोकतंत्र, संविधान और नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा कितनी महत्वपूर्ण है।
