मानसून से पहले सरकार और प्रशासन की तैयारियां सिर्फ कागजों तक सीमित : प्रदीप चौधरी

 

हेमंत कुमार/ रमोला न्यूज़

कालका : कालका से पूर्व विधायक एवं कांग्रेस पार्टी के नेता प्रदीप चौधरी ने मानसून की तैयारियों को लेकर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साल भारी बरसात के दौरान कालका विधानसभा क्षेत्र के लोगों को जलभराव, टूटी सड़कों और बंद रास्तों जैसी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी हालात में कोई बड़ा सुधार नजर नहीं आ रहा है। जिन रास्तों और सड़कों को बरसात ने नुकसान पहुंचाया था, उनमें से कई जगह आज भी स्थायी समाधान नहीं किया गया। बरसात सिर पर है, लेकिन पानी की निकासी, नालों की सफाई और संवेदनशील स्थानों पर पुख्ता इंतजाम केवल दावों और फाइलों तक सीमित दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब हर साल मानसून आता है तो लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है, लेकिन सरकार समय रहते सबक नहीं लेती।

 

प्रदीप चौधरी ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र मोरनी में बरसात की सबसे ज्यादा मार पड़ती है। भारी बारिश के दौरान जगह-जगह भूस्खलन होने से सड़कें बंद हो जाती हैं, जिसका सीधा असर स्थानीय लोगों और किसानों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि मोरनी क्षेत्र के किसान बड़ी मात्रा में सब्जियों की खेती करते हैं, लेकिन बरसात में रास्ते बंद होने के कारण कई बार उनकी फसल समय पर मंडियों तक नहीं पहुंच पाती और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रशासन बताए कि मानसून से पहले संवेदनशील जगहों पर क्या इंतजाम किए गए हैं? क्या भूस्खलन वाले क्षेत्रों में तुरंत रास्ते खोलने के लिए जेसीबी मशीनों और टीमों की व्यवस्था की गई है? पहाड़ों से मलबा आने और रास्ते बंद होने की स्थिति से निपटने के लिए क्या ठोस योजना बनाई गई है? उन्होंने कहा कि केवल कागजी बैठकों से काम नहीं चलेगा, लोगों को जमीन पर व्यवस्था दिखाई देनी चाहिए ताकि बरसात के दौरान जनता को परेशानी न झेलनी पड़े।

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