विवादित पुस्तकों की जब्ती के लिए राजपत्र अधिसूचना जारी करने की मांग, RAAG ने उपराज्यपाल को लिखा पत्र

 

जम्मू, 8 जुलाई: (रंजीव मेहता)

कानूनी शोध, लोक नीति, संवैधानिक वकालत तथा राष्ट्रीय सुरक्षा एवं अखंडता से जुड़े मुद्दों पर कार्य करने वाले पंजीकृत ट्रस्ट रिसर्च एंड एडवोकेसी ग्रुप (RAAG) ने जम्मू-कश्मीर में विवादित पुस्तकों के मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए उपराज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है।

RAAG के प्रबंध न्यासी एवं अधिवक्ता दीपक शर्मा ने उपराज्यपाल को भेजे गए प्रतिनिधित्व में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 98 के तहत राजपत्र अधिसूचना जारी कर दो विवादित पुस्तकों को जब्त (फॉरफिट) घोषित करने तथा उनकी सभी प्रतियां जब्त करने की मांग की है।

ज्ञापन में जिन दो पुस्तकों का उल्लेख किया गया है, उनमें “Personalities and Legends of J&K (Series 4)”, जिसके लेखक हिलाल अहमद और संतोष मीणा हैं तथा जिसका प्रकाशन ओबेरॉय बुक सर्विस, जम्मू द्वारा किया गया है, और “Great Personalities of Jammu and Kashmir”, जिसके लेखक डॉ. सुशांत गिरी हैं तथा जिसका प्रकाशन अनुराग प्रकाशन, दिल्ली ने किया है, शामिल हैं।

RAAG का कहना है कि यह मामला केवल शैक्षणिक त्रुटि या पुस्तक चयन में हुई सामान्य लापरवाही का नहीं है। संगठन का आरोप है कि समग्र शिक्षा योजना के तहत खरीदी गई इन पुस्तकों में ऐसी सामग्री शामिल है, जो भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती देती है। ज्ञापन के अनुसार पुस्तकों में कथित रूप से “Indian Occupied Kashmir” जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है तथा अलगाववादी और आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों का महिमामंडन किया गया है।

संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि पुस्तकों में मकबूल भट को “शहीद” और “राष्ट्रपिता” के रूप में प्रस्तुत कर छात्रों के बीच अलगाववादी विचारधारा को वैधता देने का प्रयास किया गया है।

RAAG ने इस मामले में सरकार द्वारा अब तक की गई कार्रवाई, जिसमें अधिकारियों का निलंबन तथा काउंटर इंटेलिजेंस विंग द्वारा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और BNSS के तहत एफआईआर दर्ज करना शामिल है, की सराहना की है। हालांकि संगठन का कहना है कि केवल एफआईआर दर्ज होने से इन पुस्तकों की बिक्री, निजी वितरण या प्रसार स्वतः नहीं रुकता।

ज्ञापन में कहा गया है कि BNSS की धारा 98 के तहत सरकार को ऐसे आपत्तिजनक प्रकाशनों की सभी प्रतियों को जब्त घोषित करने तथा देश में कहीं भी मिलने पर उन्हें जब्त करने का अधिकार प्राप्त है। इसलिए इस प्रावधान का तत्काल उपयोग किया जाना चाहिए।

अधिवक्ता दीपक शर्मा ने कहा कि धारा 98 के तहत औपचारिक राजपत्र अधिसूचना जारी करना आवश्यक है, ताकि इन पुस्तकों को निजी वितरकों, खुले बाजार, निजी पुस्तकालयों अथवा जम्मू-कश्मीर के बाहर स्थित शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचने से रोका जा सके।

RAAG ने उपराज्यपाल से यह भी अनुरोध किया है कि जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और अन्य स्थानों पर संबंधित प्रकाशकों, प्रिंटिंग प्रेसों तथा वितरकों के परिसरों में तलाशी एवं जब्ती अभियान चलाकर पुस्तकों की सभी मुद्रित प्रतियां, डिजिटल कॉपियां, पांडुलिपियां, प्रूफ तथा अन्य संबंधित सामग्री को अपने कब्जे में लिया जाए।

संगठन ने प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों और वरिष्ठ प्रशासकों की एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की है, जो केंद्रशासित प्रदेश के सरकारी, सहायता प्राप्त, निजी, सामुदायिक तथा गैर-औपचारिक शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के लिए उपलब्ध पाठ्यपुस्तकों, पुस्तकालय पुस्तकों और अन्य अध्ययन सामग्री की व्यापक समीक्षा करे।

इसके अलावा, RAAG ने भविष्य में पुस्तकों और शैक्षणिक सामग्री की खरीद से पहले अनिवार्य केंद्रीकृत कानूनी जांच (प्री-स्क्रीनिंग) नीति लागू करने की मांग की है, ताकि इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

ज्ञापन में संविधान के मूल्यों, अनुच्छेद 51(ए) के तहत नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों, राष्ट्रीय एकता तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का हवाला देते हुए कहा गया है कि छात्रों को उपलब्ध कराई जाने वाली शैक्षणिक सामग्री में संवैधानिक मूल्यों, राष्ट्रीय एकीकरण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता के प्रति सम्मान को बढ़ावा मिलना चाहिए।

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