राहुल-प्रियंका का धरना सिर्फ राजनीतिक ड्रामा, संसद से पहले विपक्ष रचता है पटकथा : अनिल विज*

 

*दीपक मिगलानी*

चंडीगढ़। हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में दिल्ली में हुए धरने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे संसद सत्र से पहले विपक्ष की “राजनीतिक पटकथा” का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि हर बार संसद का सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस किसी न किसी मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरती है और माहौल बनाने का प्रयास करती है।

विज ने कहा कि लोकतंत्र में धरना-प्रदर्शन करने का अधिकार सभी को है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि सैकड़ों लोगों को लेकर लोकसभा के भीतर प्रदर्शन करने की अनुमति मांगने लगे। दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक देश में संसद के भीतर इस तरह के प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी जाती। उन्होंने कहा कि जनता ने सांसदों को सदन में अपनी बात रखने के लिए चुना है और राहुल गांधी को भी सड़क की बजाय संसद में अपनी बात रखनी चाहिए।

महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए विज ने कहा कि कांग्रेस अपने आंदोलनों की तुलना गांधीजी से करती है, जबकि महात्मा गांधी ने हमेशा अहिंसक आंदोलन किए और कभी भी हिंसा या पुलिस पर पथराव का समर्थन नहीं किया। इसलिए वर्तमान घटनाओं की तुलना गांधीजी के आंदोलनों से करना उचित नहीं है।

पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए अनिल विज ने कहा कि राहुल गांधी बार-बार परीक्षा पत्र लीक की बात करते हैं, लेकिन उन्हें यह भी बताना चाहिए कि कांग्रेस शासन के दौरान कितने पेपर लीक हुए और उस समय किस मंत्री ने इस्तीफा दिया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार दोषियों को पकड़कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है और किसी को भी बख्शा नहीं जा रहा।

विज ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह अब “बाधा की राजनीति” करने वाली पार्टी बन गई है। संसद का हर सत्र शुरू होने से पहले विपक्ष कोई नया विवाद खड़ा कर देता है ताकि सदन की कार्यवाही प्रभावित हो। उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी को वास्तव में युवाओं और पेपर लीक की चिंता होती तो वे केवल धरना-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि संसद के भीतर इस विषय पर प्रभावी ढंग से अपनी बात रखते।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सरकार को जवाबदेह बनाना और जनहित के मुद्दे उठाना है, लेकिन कांग्रेस का पूरा ध्यान केवल विरोध, प्रदर्शन और राजनीतिक टकराव पर केंद्रित दिखाई देता है। यही कारण है कि राहुल गांधी एक प्रभावी विपक्षी नेता की भूमिका निभाने में लगातार असफल साबित हो रहे हैं।

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