पंचकूला नगर निगम क्षेत्र में घर -घर से कूड़ा एकत्रित करने का कार्य पूरी तरह फ्लॉप- ओ पी सिहाग

पंचकूला नगर निगम क्षेत्

विक्रांत शर्मा/ रमोला न्यूज़ ब्यूरो

पंचकूला, 28 जुलाई: जननायक जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष ओ पी सिहाग ने पंचकूला नगर निगम क्षेत्र में सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले के मुकाबले लगभग डेढ़ करोड़ रुपये प्रति महीने ज्यादा खर्चा करने एवं नई मशीनरी होने के बावजूद भी शहर की सफाई व्यवस्था बुरी तरह से चरमरा चुकी है। निगम क्षेत्र के किसी भी सेक्टर , कालोनी या गाँव में हर जगह कूड़े एवं पॉलिथीन के ढेर दिखाई देते हैं , जिसमें आवारा पशु मुहँ मारते रहते हैं। सिहाग ने कहा कि बारीश के दिनों में तो स्थिती और भी भयावह हो जाती है।

जजपा ज़िला अध्यक्ष ने कहा कि नगर निगम पंचकूला ने कुछ सालों पहले शहर को और अधिक साफ स्वच्छ रखने के लिए इंदौर शहर की नकल करते हुए शहर में रखे लगभग 250 बड़े गारबेज बीन ( 3 क्यूबिक मीटर साइज़ ) एवं 100 के करीब छोटे गारबेज बीन (1 क्यूबिक मीटर साइज़ ) को हटाकर डस्टबीन फ्री शहर बनाने की कोशिश की थी। इसके अलावा एक नया टेन्डर जो लगभग डेढ़ करोड़ रुपये प्रति महीना का है जिसमें ठेकेदार को नगर निगम में शामिल हर घर तथा प्रतिष्ठान से सूखा एवं गीला कूड़ा अलग- अलग उठाकर निगम द्वारा निर्धारित किए गए डंपिंग ग्राउंड में ले जाना था , अलॉट किया था । इस तरह इस योजना से पूरे शहर में कहीं कूड़ा कर्कट मिलना ही नहीं चाहिए परंतु क्या धरातल पर ऐसा हो पाया ? क्या डोर टु डोर गारबेज कलेक्शन करने वाले पुरे निगम क्षेत्र से टेन्डर की निर्धारित शर्तों के अनुसार हर घर या प्रतिष्ठान से हर रोज़ सूखा व गीला कूड़ा अलग अलग उठाकर ले जा रहे हैं? जजपा ज़िला अध्यक्ष सिहाग ने कहा कि टेंडर की शर्तों अनुसार नगर निगम क्षेत्र में कहीं भी सूखा या गीला कूड़ा अलग अलग नहीं उठाया जा रहा है तथा न ही हर घर से कूड़ा हर रोज उठाया जा रहा है।

ओ पी सिहाग ने कहा कि शहर को डस्टबीन फ्री करने एवं डोर टु डोर गारबेज कलेक्शन की योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। उन्होंने कहा कि आप शहर के किसी भी हिस्से में चले जाइए जहां पहले बड़े डस्टबीन रखे हुए थे अब उनकी जगह बिल्कुल खुले में कूड़ा गिरा मिलता है जबकि ठेके की शर्तों अनुसार शहर में किसी भी जगह कूड़ा मिलना ही नहीं चाहिए। उन्होंने आयुक्त नगर निगम पंचकूला एवं मेयर नगर निगम पंचकूला से आग्रह किया है कि वो स्वयं इस बारे मोका पर जाकर देखे कि किस प्रकार नगर निगम क्षेत्र की सफाई व्यवस्था बदहाल है। जब सफ़ाई का कार्य ठीक ढंग से हो ही नहीं रहा है तो नगर निगम को करोडों रुपये की चपत क्यों लगाई जा रही है।

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