गुरुग्राम : राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RAJ-RERA) के एडजुडिकेटिंग ऑफिसर आर. एस. कुलहरि ने आम आदमी के घर के सपने के साथ खिलवाड़ करने वाले बिल्डरों को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने ‘रूहानी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड’ की सेवा में गंभीर दोष मानते हुए शिकायतकर्ता प्रेमचंद सैनी के पक्ष में फैसला सुनाया है। अथॉरिटी ने बिल्डर को आदेश दिया है कि वह आवंटी को मानसिक संताप, अवसर की हानि और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में कुल ₹1,60,000 (हर्जाना + कानूनी खर्च) का भुगतान करे।
क्या है मामला?
अलवर निवासी प्रेमचंद सैनी ने रूहानी डेवलपर्स गुरुग्राम के ‘रूहानी हाइट्स’ प्रोजेक्ट में मुख्यमंत्री जन आवास योजना (CMJAY) के तहत एक 2-BHK फ्लैट बुक किया था। इस फ्लैट की कुल कीमत ₹8,80,000 तय की गई थी। आवंटी ने समय-समय पर भुगतान किया, लेकिन बिल्डर ने अनुबंध की शर्तों के अनुसार न तो प्रोजेक्ट पूरा किया और न ही फ्लैट का कब्जा सौंपा। कब्जा देने में विफल रहने के कारण आवंटी को न केवल वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा, बल्कि उसे अपने आशियाने के लिए सालों तक मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ी।
अदालत का कड़ा रुख:
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि मुख्य रेरा अथॉरिटी पहले ही आवंटी को ब्याज सहित रिफंड दिलाने का आदेश दे चुकी है। हालांकि, एडजुडिकेटिंग ऑफिसर ने स्पष्ट किया कि सेवा में कमी के कारण आवंटी को जो अतिरिक्त प्रताड़ना मिली है, उसके लिए मुआवजा अनिवार्य है। अथॉरिटी ने अपने आदेश में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में निर्माण लागत और रियल एस्टेट की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। यदि आवंटी आज उसी इलाके में नया फ्लैट लेना चाहे, तो उसे कहीं अधिक कीमत चुकानी होगी, जिसे ‘अवसर की हानि’ माना गया।
रेरा का सख्त आदेशः
अथॉरिटी ने बिल्डर की लापरवाही को देखते हुए आदेश दिए हैं कि अवसर की हानि और बढ़ती कीमतों के एवज में 1,00,000 रुपए, सेवा में दोष और प्रताड़ना के लिए 50,000 रुपए और आवंटी को कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगवाने के लिए 10,000 रुपए अलग से दिए जाएं। अथॉरिटी ने रूहानी डेवलपर्स को निर्देश दिया है कि वह इस आदेश के अपलोड होने के 45 दिनों के भीतर पूरी राशि का भुगतान करे। यदि बिल्डर निर्धारित समय में भुगतान नहीं करता है, तो उसे इस कुल हर्जाना राशि पर 6% वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।
