युवा गायक हरी मोहन सिंह का पहला रवांल्टी गीत बना आकर्षण का केंद्र

 

तिलक चंद रमोला नौगांव: नौगांव विकासखंड के युवा यूट्यूबर एवं गायक हरी मोहन सिंह ने अपने पहले रवांल्टी गीत के माध्यम से रवांई क्षेत्र की संस्कृति, बोली और लोक परंपराओं को खूबसूरती से प्रस्तुत किया है। गीत की शुरुआत रवांल्टी भाषा की पंक्तियों “हिमालय की गोद मां बसीयू रौतेंली रवांई, उब्बू बाबरू उंदू जौनसार के बाद प्यारी देंखेंदी है भाया हिमालय क गोद बसीई प्यारी रवांई” से होती है, जो श्रोताओं को अपनी मिट्टी और लोक संस्कृति से जोड़ने का कार्य करती हैं।

गीत में रवांई-जौनसार क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, लोक संस्कृति और पहाड़ी जीवन का जीवंत चित्रण किया गया है। विशेष बात यह है कि गीत की शुरुआत पारंपरिक “बाजूबंद” धुन से की गई है, जिससे गीत में लोक संगीत की मिठास और अधिक बढ़ गई है।

इस गीत में रवांई की बोली-भाषा, पारंपरिक वाद्य यंत्रों, बारह महीनों में मनाए जाने वाले त्योहारों, स्थानीय रीति-रिवाजों तथा आपसी भाईचारे का सुंदर चित्रण किया गया है। गीत सुनने के बाद लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं की याद ताजा हो रही है।

स्थानीय लोगों द्वारा गीत को खूब सराहा जा रहा है। मंजियाली गांव के चैन सिंह रावत, सुरेंद्र राणा तथा नौगांव गांव के गायक विजयपाल रावत ने गीत की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से क्षेत्रीय भाषा और लोक संस्कृति को नई पहचान मिल रही है।

युवाओं का कहना है कि इस प्रकार के गीत नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और लोक परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं। गीत सोशल मीडिया और यूट्यूब पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

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