रोमी सिंह /रमोला न्यूज़
पंचकूला 18 जून ।
शिवालिक विकास मंच प्रदेश अध्यक्ष एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय बंसल एडवोकेट ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को ज्ञापन भेज कर वर्ष 1993 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन विधायक चंद्र मोहन के प्रयासों से तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय चौधरी भजनलाल द्वारा बेहद पिछड़े हुए जिला पंचकूला अंबाला और यमुनानगर के विकास के लिए गठित किए गए शिवालिक विकास बोर्ड को जो अब लगभग बंद पड़ा है उसे पुनः संचालित कर शिवालिक विकास बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता कर शिवालिक बेल्ट के लिए विशेष बजट जारी करने और उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश के बद्दी -बरोटीवाला औद्योगिक क्षेत्र की तर्ज पर पूरी शिवालिक बेल्ट के यमुनानगर अंबाला और पंचकूला जिले को आर्थिक एवं औद्योगिक पैकेज देने की मांग की है।
विजय बंसल एडवोकेट ने कहा कि बेहद पिछड़े हुए अर्ध पहाड़ी क्षेत्र के विकास के लिए शिवालिक विकास बोर्ड का गठन एक वरदान के रूप में उभर कर आया था लेकिन पिछले कई वर्षों से न केवल शिवालिक विकास बोर्ड बल्कि पूरा शिवालिक क्षेत्र राजनीतिक उपेक्षा का शिकार रहा है। विजय बंसल ने कहा कि यह एक विडंबना ही है कि नायब सिंह सैनी शिवालिक क्षेत्र के नारायणगढ़ से हरियाणा के इतिहास में पहली बार हरियाणा प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं लेकिन बावजूद इसके शिवालिक क्षेत्र विकास के मामले में पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों को उम्मीद थी कि पहली बार हमारे क्षेत्र के व्यक्ति के मुख्यमंत्री बनने के बाद विकास में तेजी आएगी लेकिन पूर्व के मुख्यमंत्री की तरह वर्तमान मुख्यमंत्री ने भी शिवालिक क्षेत्र विशेष कर जिला पंचकूला के कालका क्षेत्र की विकास के मामले में उपेक्षा की है।
विजय बंसल एडवोकेट ने बताया कि वैसे तो वर्ष 2008 के बाद से ही मुख्यमंत्री ने शिवालिक विकास बोर्ड की वार्षिक बैठक की अध्यक्षता करनी बंद कर दी थी जिससे क्षेत्र का विकास रुक गया था। इतना ही नहीं वर्ष 2002 के बाद से शिवालिक विकास बोर्ड के सरकारी एवं गैर सरकारी सदस्यों की नियुक्ति भी नहीं की गई थी लेकिन शिवालिक विकास मंच ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 2013 में मुख्यमंत्री को न केवल शिवालिक विकास बोर्ड का पुनर्गठन करने के लिए बाध्य किया था बल्कि शिवालिक विकास बोर्ड के सरकारी गैर सरकारी सदस्यों की नियुक्तियां भी की गई थी और तिवारी विकास बोर्ड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भी नियुक्त किया गया था इसके साथ ही शिवालिक विकास बोर्ड के कुल बजट का 50% हिस्सा पंचकूला जिले में लगाने का प्रावधान भी किया गया था। लेकिन वर्ष 2014 में चुनाव हुए इसके बाद नव निर्वाचित तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने वर्ष 2015 में शिवालिक विकास बोर्ड की वार्षिक बैठक की अध्यक्षता की उसके बाद ना तो तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ना ही वर्तमान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शिवालिक विकास बोर्ड की वार्षिक बैठक की अध्यक्षता की। जिस कारण शिवालिक विकास बोर्ड की गतिविधियां लगभग समाप्त हो चुकी हैं।
विजय बंसल एडवोकेट ने कहा कि वर्तमान सरकार ने ताजेवाला से लेकर नारायणगढ़ तक की मंजूर नहर और चंडीगढ़ से यमुनानगर तक रेलवे लाइन नहीं बनाई गई इतना ही नहीं कालका और जिला पंचकूला एवं आसपास के क्षेत्र की जीवन रेखा कही जाने वाली एचएमटी ट्रैक्टर फैक्ट्री को वर्ष 2016 में केंद्र सरकार द्वारा बंद करने के बाद यहां पर बेरोजगारी बहुत अधिक बढ़ चुकी है। इतना ही नहीं वर्ष 1997 में सूरजपुर की एसीसी सीमेंट फैक्ट्री को भी बंद कर दिया गया था इसलिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से क्षेत्र के लाखों लोग बेरोजगार हो चुके हैं। इसलिए तत्काल रूप से मुख्यमंत्री न केवल शिवालिक विकास बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता कर इलाके के विकास के लिए विशेष बजट जारी करें और साथ ही क्षेत्र की बेरोजगारी दूर करने के लिए उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बद्दी- बरोटी वाला औद्योगिक क्षेत्र की तर्ज पर शिवालिक क्षेत्र एवं कालका विधानसभा क्षेत्र को औद्योगिक रूप से पिछड़ा क्षेत्र घोषित किया जाए। ताकि क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सके। क्योंकि अब कालका विधानसभा क्षेत्र के लोगों को रोजगार के लिए हिमाचल प्रदेश, पंजाब की कंपनियों में दूर-दूर तक नौकरी के लिए जाना पड़ रहा है यदि कालका क्षेत्र में ही फैक्ट्रियां लगा दी जाए तो युवाओं को रोजगार के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा।
विजय बंसल ने बताया कि शिवालिक विकास बोर्ड के गठन के बाद पहाड़ी एवं अर्ध पहाड़ी शिवालिक क्षेत्र में पानी के ट्यूबवेल सड़कें बनाने, सहित अन्य विकास कार्यों शिवालिक क्षेत्र में कार्य करने वाले सरकारी कर्मचारियों की नौकरियां आदि के नियमों में भी विशेष रियायत देने का प्रावधान किया गया था। जिसमें पीने के पानी और सिंचाई के ट्यूबवेल लगाने और सड़क आदि बनाने के लिए हरियाणा के मैदानी इलाके में निर्धारित नियम थे उनमें से शिवालिक क्षेत्र को विशेष छूट देने का प्रावधान किया गया था। जिसके बाद पहाड़ी क्षेत्र मोरनी एवं अर्ध पहाड़ी क्षेत्र कालका, पिंजौर सहित आसपास के सभी इलाकों में सैकड़ो ट्यूबवेल, सड़के, सिंचाई की कुहले बनी, रिटेनिंग वॉल निर्माण, ढानियों में बिजली उपलब्ध करवाने हैंड पंप लगाएं घने जंगल में बसे हुए दुर्गम क्षेत्र के धामसू गांव में सड़क, भवनो, धर्मशालाओ आदि का निर्माण किया गया था साथ ही वनों की सुरक्षा और सॉइल कंजर्वेशन का भी काम किया गया। लेकिन अब वर्तमान बीजेपी सरकार ने शिवालिक विकास बोर्ड को लगभग समाप्त कर क्षेत्र की उपेक्षा कर रही है। जिससे लोगों में भारी रोष व्याप्त है।
