पत्रकारों को कवरेज से रोकने पर होगी बड़ी कार्रवाई

 

विक्रांत शर्मा ब्यूरो रमोला न्यूज़/पंचकूला। :-
लोकतंत्र में पत्रकारों को समाज का चौथा स्तंभ माना जाता है। पत्रकारों का काम जनहित से जुड़े मामलों को सामने लाना और लोगों की आवाज को प्रशासन तथा सरकार तक पहुंचाना है। ऐसे में किसी पत्रकार को उसकी ड्यूटी के दौरान खबर की कवरेज करने, फोटो या वीडियो बनाने से रोकना, धमकाना, गाली-गलौज करना, मारपीट करना या कैमरा और अन्य उपकरणों को नुकसान पहुंचाना गंभीर मामला हो सकता है।

1 जुलाई 2024 से देश में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS लागू है, जिसने IPC की जगह ली है। पत्रकारों को भी अपने कानूनी अधिकारों और उपलब्ध प्रावधानों की जानकारी रखना जरूरी है।

कवरेज में बाधा डालने पर कार्रवाई

यदि कोई व्यक्ति पत्रकार को सार्वजनिक स्थान पर कवरेज करने से रोकता है, रास्ता रोकता है या जबरन कैमरा पकड़ने की कोशिश करता है, तो मामले की परिस्थितियों के अनुसार BNS की धारा 126 और 127 जैसे प्रावधान लागू हो सकते हैं।

वहीं, यदि किसी पत्रकार को उसके काम से रोकने के लिए धमकी, दबाव या बल प्रयोग किया जाता है, तो पुलिस शिकायत में घटना की पूरी जानकारी दर्ज करवाना जरूरी है।

कैमरा या अन्य उपकरण तोड़ने पर भी कार्रवाई

कवरेज के दौरान पत्रकार का कैमरा, मोबाइल, माइक या अन्य उपकरण छीनना अथवा तोड़ना केवल पत्रकार के काम में बाधा डालना ही नहीं, बल्कि संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला भी बन सकता है। ऐसे मामलों में BNS की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

यदि किसी पत्रकार से जबरन वीडियो या फोटो डिलीट करवाया जाता है, तो घटना की परिस्थितियों, इस्तेमाल किए गए तरीके और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को इसकी जानकारी देना जरूरी है। केवल किसी एक धारा का नाम लिख देना पर्याप्त नहीं होता; पुलिस मामले के तथ्यों के आधार पर उचित कानूनी प्रावधान तय करती है।

धमकी, गाली-गलौज और मारपीट पर भी शिकायत

अगर कवरेज के दौरान पत्रकार को जान से मारने या नुकसान पहुंचाने की धमकी दी जाती है, गाली-गलौज की जाती है या उसके साथ मारपीट की जाती है, तो इसकी शिकायत पुलिस को तुरंत करनी चाहिए।

मामले के तथ्यों के अनुसार BNS की धारा 351 के तहत आपराधिक धमकी, धारा 352 के तहत अपमान से संबंधित प्रावधान तथा चोट लगने की स्थिति में BNS की संबंधित धाराएं लागू हो सकती हैं।

FIR में घटना की पूरी जानकारी दर्ज करवाना जरूरी

पत्रकार को शिकायत देते समय केवल यह लिखवाने के बजाय कि उसे कवरेज से रोका गया, पूरे घटनाक्रम का विवरण देना चाहिए। इसमें घटना का समय, स्थान, आरोपी का नाम या हुलिया, मौजूद गवाह, कैमरा या मोबाइल को नुकसान, धमकी, मारपीट, वीडियो डिलीट कराने का प्रयास और उपलब्ध फोटो-वीडियो साक्ष्य का उल्लेख किया जाना चाहिए।

शिकायत में पत्रकार इस तरह लिख सकता है—

“मैं ______ समाचार पत्र/न्यूज चैनल का ______ क्षेत्र का पत्रकार हूं। मैं जनहित से जुड़ी खबर की कवरेज कर रहा था। इसी दौरान आरोपी ______ ने मुझे कवरेज करने से रोका तथा मेरे साथ गाली-गलौज/धमकी/हाथापाई की। आरोपी द्वारा मेरे कैमरे/मोबाइल/माइक को छीनने अथवा नुकसान पहुंचाने तथा रिकॉर्ड की गई सामग्री को डिलीट कराने का प्रयास किया गया। घटना के संबंध में उपलब्ध फोटो, वीडियो और गवाहों की जानकारी पुलिस को दी जा रही है। अत: पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के अनुसार उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।”

पत्रकार रखें इन बातों का ध्यान

कवरेज के दौरान किसी विवाद की स्थिति पैदा होने पर पत्रकार को यथासंभव घटनास्थल की फोटो-वीडियो सुरक्षित रखनी चाहिए। यदि संभव हो तो मौके पर मौजूद गवाहों के नाम और संपर्क विवरण भी नोट किए जा सकते हैं। चोट लगने की स्थिति में मेडिकल करवाना और संबंधित पुलिस थाने में लिखित शिकायत देना भी महत्वपूर्ण है।

कानून किसी भी व्यक्ति को पत्रकार के साथ मनमानी करने का अधिकार नहीं देता, लेकिन पत्रकारों को भी अपनी रिपोर्टिंग के दौरान कानून, निजी अधिकारों और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े नियमों का पालन करना चाहिए।

पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
ट्राईसिटी प्रेस क्लब ने भी इस कानून भरपूर प्रशंसा करते हुए कहा कहा कि चौथा स्तंभ की सुरक्षा, आर्थिक सहायता, मान्यता प्राप्त तथा पेंशन आदि की व्यवस्था सरकार की ही जिम्मेदारी बनती है।

 

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