सुमेश कुमार/ रमोला न्यूज़ ब्यूरो
चंडीगढ़, 6 सितंबर, : राज्य जैव विविधता बोर्डों (एसबीबी) और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों (यूटीबीसी) के 16वें राष्ट्रीय सम्मेलन का आज चंडीगढ़ में उद्घाटन हुआ। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) द्वारा आयोजित यह दो दिवसीय सम्मेलन 6 से 7 सितंबर, 2026 तक चलेगा। सम्मेलन में देशभर के राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों के अध्यक्ष एवं सदस्य सचिवों के साथ वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ और वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं।
उद्घाटन सत्र में पंजाब के राज्यपाल एवं प्रशासक, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़, श्री गुलाब चंद कटारिया; केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव तथा हरियाणा सरकार के पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री श्री राव नरबीर सिंह उपस्थित रहे।
इस अवसर पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव श्री तन्मय कुमार; वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, श्री सुशील कुमार अवस्थी; मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री आशुतोष अग्निहोत्री; राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री वीरेंद्र तिवारी तथा केंद्रीय मंत्रालय, राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
इस दौरान केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के गृह सचिव श्री मंदीप सिंह बराड़ तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा सचिव श्री सौरभ कुमार भी उपस्थित रहे।
सभा को संबोधित करते हुए श्री गुलाब चंद कटारिया ने भारत की समृद्ध जैविक विरासत और पारंपरिक पर्यावरणीय मूल्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पारिस्थितिक सुरक्षा का खाद्य एवं जल सुरक्षा, आजीविका और सतत विकास से गहरा संबंध है। उन्होंने जैव विविधता संरक्षण के आधुनिक उपायों के साथ पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक भागीदारी के समन्वय के महत्व को रेखांकित किया।
राज्यपाल ने पंजाब और चंडीगढ़ की आर्द्रभूमियों, नदी पारिस्थितिकी तंत्रों और कृषि जैव विविधता के पारिस्थितिक महत्व की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने जैव विविधता प्रबंधन समितियों और जन जैव विविधता पंजियों को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए जैव विविधता संस्थानों तथा स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर समन्वय का आह्वान किया।
अपने संबोधन में श्री भूपेंद्र यादव ने भारत के प्राचीन पर्यावरणीय मूल्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत शुरू की गई मिशन लाइफ, ‘एक पेड़ मां के नाम’, अमृत सरोवर और ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम जैसी विभिन्न पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की जैव विविधता संरक्षण यात्रा में वैज्ञानिक क्षमताओं और स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को साथ लेकर आगे बढ़ा जा रहा है।
जैव विविधता अधिनियम, 2002 का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जैव विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 और जैव विविधता नियम, 2024 ने देश के जैव विविधता शासन ढांचे को और सुदृढ़ एवं सुव्यवस्थित किया है। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपने नियमों, संस्थागत तंत्रों और क्रियान्वयन प्रक्रियाओं को संशोधित ढांचे के अनुरूप बनाने का आग्रह किया।
केंद्रीय मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दिशा में भारत की प्रगति की सराहना की। इनमें जैव विविधता अभिसमय के समक्ष सातवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट और पहुंच एवं लाभ-साझाकरण से संबंधित नागोया प्रोटोकॉल के तहत पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत करना शामिल है।
जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन पर बल देते हुए श्री यादव ने देशभर में गठित 2.76 लाख से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियों को सक्रिय और प्रभावी बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जन जैव विविधता पंजियों को स्थानीय निकायों के लिए गतिशील नियोजन साधनों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय जैव विविधता और उससे जुड़े पारंपरिक ज्ञान से संबंधित जानकारी स्थानीय योजना एवं सतत विकास में सार्थक योगदान दे सके।
पहुंच एवं लाभ-साझाकरण (एबीएस) का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने किसानों, स्थानीय समुदायों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों, राज्य जैव विविधता बोर्डों, केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों और अनुसंधान संस्थानों के बीच 200 करोड़ रुपये से अधिक की एबीएस राशि वितरित की है। उन्होंने कहा कि एबीएस तंत्र से समुदायों को ठोस लाभ मिलने के साथ जैव विविधता संरक्षण और स्थायी आजीविका को भी बढ़ावा मिलना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान कई ज्ञान उत्पादों का विमोचन भी किया गया। इनमें पिछले एक वर्ष के दौरान राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की उपलब्धियों को रेखांकित करने वाला दस्तावेज भी शामिल था, जिसमें एबीएस तंत्र और हितधारकों के बीच धनराशि के प्रभावी वितरण का विवरण प्रस्तुत किया गया है।
जैव विविधता संरक्षण और जलवायु कार्रवाई के बीच संबंधों को रेखांकित करते हुए श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत ने ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण समाज’ के दृष्टिकोण को अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के अनुरूप लगातार निर्णायक कदम उठाए हैं।
उन्होंने कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के अनुरूप तैयार की गई भारत की अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति एवं कार्ययोजना 2024–2030 का भी उल्लेख किया। उन्होंने पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्बहाली, प्रजातियों एवं प्राकृतिक आवासों के संरक्षण, कृषि जैव विविधता तथा जलवायु-अनुकूल भू-दृश्यों के विकास में मापने योग्य परिणाम हासिल करने पर बल दिया। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से वैश्विक ‘30 बाय 30’ संरक्षण लक्ष्य को प्राप्त करने में सक्रिय भागीदार बनने का आह्वान किया।
इस अवसर पर श्री राव नरबीर सिंह ने जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्बहाली की दिशा में हरियाणा द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने राज्य और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता शासन को सुदृढ़ करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण में हरियाणा की जैव विविधता प्रबंधन समितियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए इन समितियों तथा स्थानीय समुदायों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने अनुभव, नवाचार और क्रियान्वयन से संबंधित चुनौतियां साझा करने तथा जैव विविधता शासन को सुदृढ़ बनाने के व्यावहारिक उपायों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा।
सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं से संस्थागत तंत्रों को मजबूत बनाने, जैव विविधता प्रबंधन समितियों के कामकाज में सुधार, जन जैव विविधता पंजियों की गुणवत्ता एवं उपयोगिता बढ़ाने, क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित करने तथा राज्य और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता शासन ढांचे के अधिक प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता मिलने की उम्मीद है।

