सुमेश कुमार /रमोला न्यूज़ ब्यूरो
चंडीगढ़, 12 सितंबर : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान तथा माननीय न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा, मुख्य न्यायाधीश-सह-मुख्य संरक्षक, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ और माननीय न्यायमूर्ति अनूप चितकारा, कार्यकारी अध्यक्ष, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के मार्गदर्शन में आज जिला न्यायालय परिसर, सेक्टर-43, चंडीगढ़ में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया।
राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
जिला न्यायालय परिसर में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों की अध्यक्षता में 14 पीठों का गठन किया गया। इन पीठों के समक्ष समझौता योग्य आपराधिक मामले, परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत मामले, बैंक ऋण वसूली मामले, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के मामले, वैवाहिक विवाद, श्रम विवाद, मध्यस्थता मामले, अन्य दीवानी मामले, नगर निगम से संबंधित मामले और यातायात चालान आपसी सहमति से निपटारे के लिए रखे गए।
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान कार्यरत न्यायिक अधिकारियों की पीठों ने मुकदमा-पूर्व मामलों, लंबित मामलों और यातायात चालानों सहित कुल 30,145 मामलों का निपटारा किया। इन मामलों में कुल ₹18,48,13,828 की राशि का समझौता हुआ।
इसके अतिरिक्त, नियमित पीठों और स्थायी लोक अदालत (जन उपयोगी सेवाएं) द्वारा ₹16,38,342 की राशि से संबंधित 20,230 मुकदमा-पूर्व मामलों का निपटारा किया गया। राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोग, चंडीगढ़ ने ₹4,25,76,94,574 की राशि से संबंधित 62 मामलों का निपटारा किया, जबकि ऋण वसूली अधिकरण-द्वितीय, चंडीगढ़ ने ₹7.79 करोड़ की राशि से संबंधित 10 मामलों का निपटारा किया।
श्री पुनीत मोहन शर्मा, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, चंडीगढ़ की पीठ के समक्ष लंबित एक वैवाहिक विवाद में सुश्री हरिंदर सिद्धू, कार्यवाहक जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चंडीगढ़ ने स्थायी एवं सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए प्रयास किए। पक्षकारों के साथ विस्तृत बातचीत के दौरान पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि नाबालिग बच्चे का कल्याण सर्वोपरि है, क्योंकि माता-पिता के वैवाहिक विवादों से बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। पक्षकारों ने आपसी सहमति से समाधान तलाशने के लिए कुछ समय मांगा।
सुश्री हरिंदर सिद्धू ने वादकारियों को प्रोत्साहित किया कि वे अपनी वास्तविक समस्याएं न्यायाधीशों के समक्ष खुलकर रखें, ताकि उनके विवादों के समाधान के लिए सार्थक प्रयास किए जा सकें।
राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन माननीय न्यायमूर्ति अनूप चितकारा, कार्यकारी अध्यक्ष, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के मार्गदर्शन में किया गया। गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित लोक अदालतें विवादों के शीघ्र और सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए न्यायालयों के एक प्रभावी पूरक मंच के रूप में उभरी हैं।
सुश्री हरिंदर सिद्धू; श्री अरुण कुमार अग्रवाल, सदस्य सचिव, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़; श्री सचिन यादव, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, चंडीगढ़; और सुश्री सोनाली सिंह, सिविल जज (सीनियर डिवीजन)-सह-कार्यवाहक सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चंडीगढ़ ने राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के लिए सभी हितधारकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आमजन से अपने विवादों का समाधान लोक अदालतों के माध्यम से कराने की अपील की, क्योंकि ये त्वरित, किफायती और सौहार्दपूर्ण न्याय प्रदान करती हैं।

