सोनिका भाटिया / रमोला न्यूज़
चंडीगढ़
पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) के 30 अप्रैल को होने वाले 39वें दीक्षांत समारोह की तैयारियों के बीच, निदेशक प्रो. विवेक लाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए संस्थान की यात्रा, प्रमुख उपलब्धियों और भविष्य की रूपरेखा साझा की। उन्होंने कहा कि आगामी दीक्षांत समारोह केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और अनुसंधान में पीजीआईएमईआर की उत्कृष्टता के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है।
इस अवसर को “ऐतिहासिक, पवित्र और अत्यंत प्रेरणादायक” बताते हुए, प्रो. लाल ने जानकारी दी कि दीक्षांत समारोह में भारत सरकार के माननीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जबकि नीति आयोग के सदस्य डॉ. विनोद पॉल विशिष्ट अतिथि होंगे। उन्होंने उनकी उपस्थिति के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह संस्थान के राष्ट्रीय महत्व और सार्वजनिक स्वास्थ्य में उसके योगदान को दर्शाता है।
इस वर्ष लगभग 550 स्नातक विद्यार्थियों को माननीय मंत्री द्वारा उपाधियां प्रदान की जाएंगी। प्रो. लाल ने उन्हें “असाधारण प्रतिभाशाली और समर्पित” बताते हुए कहा कि प्रत्येक स्नातक न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रतीक है, बल्कि संवेदनशील और करुणामय रोगी देखभाल के प्रति गहरी प्रतिबद्धता भी रखता है।
दीक्षांत समारोह के दौरान कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया जाएगा, जिनमें एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र, अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक का शिलान्यास, एक आधुनिक मेडिकल म्यूजियम (संस्थान का पहला), तथा विभिन्न विभागों के फेज-II विस्तार शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, एक समर्पित कार्डियक इमरजेंसी सुविधा भी शुरू की गई है, जिससे हार्ट अटैक के मरीजों को बिना किसी देरी के तुरंत विशेष उपचार मिल सकेगा।
प्रो. लाल ने इस आयोजन को “बहुआयामी और प्रभावशाली” बताते हुए कहा कि ये सभी पहलें मिलकर रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ा कदम हैं। “यह केवल दीक्षांत समारोह नहीं है, बल्कि हमारी क्षमताओं का व्यापक विस्तार है,” उन्होंने कहा।
संस्थान के वैश्विक प्रभाव का उल्लेख करते हुए, प्रो. लाल ने कहा कि पीजीआईएमईआर के पूर्व छात्र दुनिया भर में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं।
उन्होंने बताया, “संयुक्त राज्य अमेरिका में कई प्रमुख चिकित्सा संगठनों के नेतृत्व में पीजीआई के पूर्व छात्र हैं। पीजीआई का नाम अपने आप में सम्मान का प्रतीक है”।
प्रो. लाल ने संस्थान के कार्यभार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पीजीआई हर वर्ष लगभग 40 लाख मरीजों को सेवाएं प्रदान करता है। इतनी बड़ी संख्या के बावजूद, संस्थान सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के अपने संकल्प पर कायम है।
आयुष्मान भारत योजना को “स्वास्थ्य सेवा में क्रांतिकारी बदलाव” बताते हुए उन्होंने कहा कि पीजीआई इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। “किडनी ट्रांसप्लांट जैसे महंगे उपचार, जो निजी क्षेत्र में 15 लाख रुपये या उससे अधिक के हो सकते हैं, यहां या तो मुफ्त या बहुत कम लागत पर उपलब्ध हैं”।
प्रो. लाल ने बताया कि परिसर में अमृत फार्मेसियों की संख्या 4 से बढ़कर 14 हो गई है, जिससे मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध हो रही हैं। साथ ही, 24×7 ऑनलाइन पंजीकरण और डिजिटल सिस्टम से सेवाएं अधिक पारदर्शी और सुगम हुई हैं।
उन्होंने ‘सारथी’ पहल का भी उल्लेख किया, जिसमें छात्र स्वयंसेवक मरीजों और उनके परिजनों की सहायता करते हैं। “यह पहल अब देश के लगभग 500 संस्थानों तक फैल चुकी है,” उन्होंने बताया।
प्रो. लाल ने कहा कि पीजीआई के संकाय सदस्य वैश्विक स्तर पर शीर्ष 2% शोधकर्ताओं में शामिल हैं, जो संस्थान की अनुसंधान क्षमता को दर्शाता है।
इस अवसर पर अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे, जिनमें प्रो. आर.के. राठो (डीन अकादमिक), पंकज राय, प्रो. विपिन कौशल (मेडिकल सुपरिंटेंडेंट), प्रो. एस.के. गुप्ता, प्रो. एस.एस. पंडाव, डॉ. विजय गोनी, प्रो. संदीप बंसल, प्रो. राजेश विजयवर्गिया, डॉ. राजीव चौहान और उम्मेद माथुर शामिल थे।
भारी मरीज संख्या और प्रतीक्षा समय की चुनौतियों को स्वीकार करते हुए, उन्होंने कहा, “इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के बीच कुछ प्रतीक्षा स्वाभाविक है, लेकिन हमारे डॉक्टर सुबह से देर शाम तक—कई बार रात 9 बजे तक—निरंतर सेवा में लगे रहते हैं।”
उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, चंडीगढ़ प्रशासन, समाजसेवियों, मीडिया और स्वास्थ्यकर्मियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही पीजीआईएमईआर इतनी बड़ी सेवा दे पा रहा है।
अंत में प्रो. लाल ने कहा, “यह दीक्षांत समारोह हमारी उपलब्धियों का प्रतीक है और भविष्य के लिए प्रेरणा भी। सेवा, करुणा और उत्कृष्टता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता आगे भी हमें मार्गदर्शन देती रहेगी।”
