अधिवक्ता परिषद चंडीगढ़ द्वारा ‘समरसता दिवस’ और अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में ‘स्टडी सर्कल’ (अध्ययन चक्र) का आयोजन किया गया।

 

सुमेश कुमार /रमोला न्यूज़

चंडीगढ़, 30 अप्रैल .

अधिवक्ता परिषद चंडीगढ़ ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में अपना मासिक ‘स्टडी सर्कल’ आयोजित किया। यह कार्यक्रम भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती के सम्मान में ‘समरसता दिवस’ (सामाजिक सद्भाव दिवस) मनाने के लिए आयोजित किया गया था।

इस सभा में कानूनी पेशेवरों और विद्वानों ने डॉ. अंबेडकर की स्थायी विरासत और उनके द्वारा समर्थित संवैधानिक मूल्यों पर विचार-विमर्श करने के लिए शिरकत की। सत्र का मुख्य विषय “न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को बनाए रखना” था।

सत्र में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के अधिवक्ता बलजिंदर सिंह खैरा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। एडवोकेट खैरा ने एक समरस समाज के लिए डॉ. अंबेडकर के दृष्टिकोण और संवैधानिक नैतिकता की रक्षा में कानूनी बिरादरी की महत्वपूर्ण भूमिका पर गहन अंतर्दृष्टि साझा की।

यह कार्यक्रम पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय परिसर के भीतर ‘लेडीज बार रूम’ में आयोजित किया गया था।

वक्ताओं ने समरसता (सामाजिक सद्भाव) की अवधारणा पर जोर दिया और कानूनी समुदाय से सामाजिक दूरियों को पाटने और समाज के सभी वर्गों के लिए समान न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

अधिवक्ता परिषद ने ऐसे मासिक अध्ययन मंडलों के माध्यम से कानूनी चिकित्सकों के बीच बौद्धिक विकास को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारतीय गणराज्य के मौलिक सिद्धांत कानूनी अभ्यास में सर्वोपरि बने रहें।

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