रवांई लोक संस्कृति की झलक
तिलक चंद रमोला नौगांव उत्तरकाशी :
रवांई क्षेत्र में इन दिनों शादी-ब्याह का सीजन पूरे शबाब पर है और इसके साथ ही स्थानीय लोक संस्कृति की रंगीन छटा भी देखने को मिल रही है। खासतौर पर डांगरा नृत्य हर गांव में आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
शादियों में आमंत्रित मेहमान, बाराती युवक-युवतियां डांगरा नृत्य के साथ-साथ हारोल, तांदी और रासों नृत्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं, जिससे माहौल पूरी तरह से सांस्कृतिक रंग में रंगा नजर आ रहा है। इन पारंपरिक नृत्यों के माध्यम से लोग अपनी समृद्ध लोक परंपराओं को जीवंत बनाए हुए हैं।
वहीं, मेहंदी और बारात के अवसर पर गांव की महिलाएं पारंपरिक परिधान जैसे घाघरा, कुर्ती, ढाटू, धोती, मंगलसूत्र और तेमाणियां पहनकर कार्यक्रम में चार चांद लगा रही हैं। उनकी सहभागिता से पूरे आयोजन में पारंपरिक सौंदर्य और उत्साह देखने को मिल रहा है। गीतांग जगेन्द्र राणा, विजय सिंह रावत, जगदीश असवाल, विजय सिंह, सुरेंद्र राणा आदि का कहना है कि रवांई की लोक संस्कृति की देश-विदेश में विशेष पहचान है, जिसे सहेजने और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
शादी-ब्याह के इन आयोजनों में लोक संस्कृति का यह जीवंत स्वरूप न केवल मनोरंजन का माध्यम बन रहा है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य भी कर रहा है।
