सुरेश चंद रमोला / रमोला न्यूज़
चिन्यालीसौड़ उत्तरकाशी।
यमुनोत्री विधानसभा की राजनीति में इन दिनों सियासी पारा चरम पर पहुंच चुका है। चुनावी रण में एक नाम तेजी से उभर रहा है जिसने संगठन, संघर्ष और जनसेवा के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है। उत्तराखंड में भागीरथी नदी घाटी विकास प्राधिकरण (BRVDA) के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता रामसुन्दर नौटियाल की बढ़ती सक्रियता ने पूरे राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। गांव की चौपालों से लेकर बाजारों तक और कार्यकर्ताओं से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सिर्फ एक ही चर्चा है क्या इस बार यमुनोत्री की राजनीति नया इतिहास लिखने जा रही है? रामसुन्दर नौटियाल की दावेदारी ने जहां समर्थकों में जबरदस्त उत्साह भर दिया है, वहीं विरोधी खेमों की बेचैनी भी अब खुलकर दिखाई देने लगी है।
भाजपा संगठन की मजबूत नींव माने जाने वाले रामसुन्दर नौटियाल पूर्व में पार्टी के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। उत्तराखंड सरकार में दो बार के राज्य मंत्री,संगठन पर गहरी पकड़ और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी मजबूत स्वीकार्यता उन्हें बाकी नेताओं से अलग पहचान दिलाती है। पूर्व में त्रिवेंद्र रावत सरकार के कार्यकाल में उन्होंने मत्स्य पालन विभाग में राज्य मंत्री के रूप में प्रभावशाली भूमिका निभाई, जबकि वर्तमान में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार में भागीरथी नदी घाटी विकास प्राधिकरण (BRVDA) के उपाध्यक्ष के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
रामसुन्दर नौटियाल की सबसे बड़ी ताकत उनका सरल, सौम्य और जमीन से जुड़ा व्यक्तित्व माना जाता है। वे उन नेताओं में शुमार हैं जो सिर्फ चुनावी मौसम में नहीं, बल्कि हर सुख-दुख में जनता के बीच खड़े दिखाई देते हैं। यही वजह है कि यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नौटियाल अब भाजपा के उन बड़े चेहरों में शामिल हो चुके हैं जिनकी पकड़ संगठन और जनता दोनों पर समान रूप से मजबूत मानी जाती है।
चिन्यालीसौड़ को नगर पालिका बनाने की मांग हो या क्षेत्र के बहुप्रतीक्षित आर्च ब्रिज निर्माण का मुद्दा, रामसुन्दर नौटियाल ने हर जनहित के विषय पर सड़क से लेकर शासन तक लंबा संघर्ष किया। वर्षों तक जनता की आवाज बनकर उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए लड़ाई लड़ी। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी उनके समर्थन का दायरा तेजी से बढ़ता दिखाई देता है
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यमुनोत्री विधानसभा दो घाटियों गंगा घाटी और यमुना घाटी से मिलकर बनी है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार गंगा घाटी में लगभग 48 हजार मतदाता हैं, जबकि यमुना घाटी में करीब 25 हजार बताए जाते हैं। मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में यमुना घाटी से वर्तमान निर्दलीय विधायक सहित पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिज्लवाण, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान, केदार सिंह रावत चार प्रमुख दावेदार मैदान में सक्रिय बताए जा रहे हैं, जबकि गंगा घाटी से अभी तक रामसुन्दर नौटियाल अकेले ऐसे बड़े और प्रभावशाली चेहरे के रूप में लम्बे समय से सक्रिय है l
सूत्रों की मानें तो यमुनोत्री विधानसभा में नौटियाल गांव गांव घर तक बढ़ती सक्रियता ने समीकरणों को बदलना शुरू कर दिया है। भाजपा कार्यकर्त्ता और स्थानीय लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है, जबकि अन्य खेमों में बेचैनी साफ महसूस की जा रही है। क्षेत्र में सघन जनसंपर्क अभियानों में बढ़ते समर्थन ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में यमुनोत्री की राजनीति नए मोड़ पर पहुंच सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यदि भाजपा संगठन ने नौटियाल पर भरोसा जताया, तो यमुनोत्री विधानसभा सीट पर चुनावी मुकाबले की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
