राजयोग मेडिटेशन से घर में सुख-शांति का वातावरण बनाएं: ब्रह्माकुमारी ज्योति बहन

 

 

रमोला न्यूज नौगांव : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, नौगांव में आयोजित नियमित आध्यात्मिक क्लास में ब्रह्माकुमारी ज्योति बहन ने राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से घर-परिवार में सुख, शांति और प्रेम का वातावरण स्थापित करने के विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि घर ही वह स्थान है जहां से सुख और शांति का संसार शुरू होता है। यदि परिवार के सदस्य आपस में प्रेम, सम्मान और सहयोग की भावना रखें तो घर स्वर्ग के समान बन सकता है। उन्होंने कहा कि बड़ों को सम्मान और छोटों को स्नेह देने से परिवार में एकता बनी रहती है तथा रिश्तों में मधुरता आती है।

ज्योति बहन ने बताया कि आज के समय में अनेक परिवारों में रिश्ते कमजोर हो रहे हैं, जिसका मुख्य कारण आपसी संवाद की कमी और नकारात्मक विचार हैं। राजयोग मेडिटेशन व्यक्ति को परमात्मा से जोड़कर मन को शांत और सकारात्मक बनाता है, जिससे परिवार में प्रेम और सौहार्द बढ़ता है।

उन्होंने भारतीय संस्कृति और सात्विक जीवनशैली को अपनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि “जैसा अन्न वैसा मन” और “जैसा पानी वैसी वाणी” की कहावत आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। भोजन बनाते समय यदि सकारात्मक और पवित्र संकल्प रखे जाएं कि यह भोजन परिवार के लिए स्वास्थ्य, शांति और खुशियां लेकर आएगा, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। इसी प्रकार जल को अमृत समान मानकर शुभ भावनाओं के साथ ग्रहण करने से मन और वाणी में पवित्रता आती है।

कार्यक्रम में ज्योति बहन ने भाग्य, स्वर्ग और नरक की अवधारणा पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने कर्मों और विचारों से ही अपना भाग्य बनाता है। अच्छे कर्म और श्रेष्ठ विचार जीवन को स्वर्ग समान बनाते हैं, जबकि नकारात्मक कर्म और विचार जीवन में दुख और अशांति का कारण बनते हैं।

उन्होंने सभी को प्रतिदिन कुछ समय राजयोग मेडिटेशन के लिए निकालने और परमात्मा की याद में रहने का संदेश देते हुए कहा कि इससे व्यक्ति का मन एकाग्र होता है, तनाव कम होता है और परिवार में सुख-शांति का वातावरण विकसित होता है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने आध्यात्मिक ज्ञान एवं राजयोग मेडिटेशन के महत्व को समझते हुए इसे अपने दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। इस मौके पर बचनी देवी, पूर्णी देवी, कौशल्या, सरिता निलम, वंदना,

आदि मौजूद थे ।

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