फ्यूजन फेस्ट 2026 में दिव्यांग कलाकारों के लिए ₹5 लाख पुरस्कार की घोषणा प्रशासक ने संगीत को युवा सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण का प्रभावी माध्यम बताया

सुमेश कुमार/ रमोला न्यूज़
चंडीगढ़, 21 जून, : पंजाब के राज्यपाल एवं यू.टी. चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया ने आज चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में संस्कृति विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा आयोजित “फ्यूजन फेस्ट 2026” के अंतर्गत विश्व संगीत दिवस 2026 समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। कार्यक्रम में संस्कृति सचिव डॉ. सैयद आबिद रशीद शाह भी उपस्थित रहे। इस आयोजन में संगीत, नृत्य और दृश्य कला के माध्यम से दिव्यांग कलाकारों एवं बच्चों की असाधारण प्रतिभा, रचनात्मकता और दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित किया गया।

एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए श्री कटारिया ने दिव्यांग कलाकारों के लिए ₹5 लाख के नकद पुरस्कार देने की घोषणा की। इस प्रकार की यह पहली पहल है, जिसका उद्देश्य उनकी कलात्मक उपलब्धियों तथा समाज में उनके योगदान को प्रोत्साहित करना और सम्मानित करना है।

सभा को संबोधित करते हुए प्रशासक ने कहा कि संगीत एक सार्वभौमिक भाषा है, जो सभी प्रकार की सीमाओं को पार कर लोगों को जोड़ने, आत्मविश्वास बढ़ाने और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग कलाकारों की प्रतिभा, दृढ़ इच्छाशक्ति और उपलब्धियां समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं तथा यह सिद्ध करती हैं कि प्रतिभा किसी भी शारीरिक सीमा की मोहताज नहीं होती।

कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों और कलाकारों द्वारा उल्लेखनीय प्रस्तुतियां दी गईं। मुख्य आकर्षण “वी आर वन (WAO)” की प्रस्तुति रही, जो भारत का पहला पेशेवर व्हीलचेयर डांस समूह है। इस समूह ने अपने प्रदर्शन के माध्यम से आत्मविश्वास, समावेशिता और संघर्षशीलता का प्रेरक संदेश दिया। वहीं, वाटिका स्पेशल स्कूल फॉर हियरिंग इम्पेयर्ड चिल्ड्रेन के विद्यार्थियों ने ऊर्जावान भांगड़ा प्रस्तुति देकर अपनी प्रतिभा और उत्साह का प्रदर्शन किया। चंडीगढ़ ललित कला अकादमी द्वारा दिव्यांग बच्चों की कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसने युवा कलाकारों को अपनी रचनात्मकता और कल्पनाशीलता प्रदर्शित करने का मंच प्रदान किया।

श्री कटारिया ने संस्कृति विभाग के समावेशी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन दिव्यांग व्यक्तियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि संगीत, कला, रंगमंच और खेल सशक्तिकरण के प्रभावी साधन हैं तथा युवाओं में आत्मविश्वास, सामाजिक समावेशन और सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम को “नशा मुक्त भारत” के संकल्प से जोड़ते हुए प्रशासक ने कहा कि सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियां युवाओं को सकारात्मक विकल्प प्रदान करती हैं तथा उनकी ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण और व्यक्तित्व विकास की दिशा में प्रेरित करती हैं। उन्होंने कलाकारों, शिक्षकों, संस्थानों और नागरिकों से स्वस्थ, समावेशी और नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर संस्कृति विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन के निदेशक श्री नवीन (DANICS) भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में दिव्यांग कलाकारों, विद्यार्थियों, सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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