पवन चोपड़ा/ रमोला न्यूज़
चंडीगढ़। हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज बेशक दिखने में कितने भी कठोर लगते हो, लेकिन पार्टी के प्रति उनसे ज्यादा कर्तव्यनिष्ठ और समर्पण भाव किसी ओर नेता में नजर नही आता। यह बात बातचीत के दौरान उन्होंने स्वयं भी कही है कि उनसे ज्यादा ओबेडिएंट बीजेपी में कोई नहीं है। 1970 से आज तक वह संगठन की विभिन्न शाखाओ में कार्य करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि पार्टी ने जब-जब जो जो आदेश दिया हर आदेश की पालना बिना सोचे समझे उन्होंने की। पहले चुनाव के दौरान जब वह बैंक में नौकरी करते थे, मात्र 17 साल की नौकरी हुई थी तो पार्टी का आदेश आया कि नौकरी छोड़ दो, हालांकि मैं 3 साल ओर नौकरी करना चाहता था ताकि 20 साल होने पर मुझे पेंशन मिल जाती। लेकिन पार्टी का आदेश था तो मैने नौकरी छोड़ दी। मैं चुनाव नहीं लड़ना चाहता था पार्टी ने जबरदस्ती चुनाव लड़वाया और मुझे विधायक बनाया। फिर कुछ समय के बाद पार्टी ने कहा कि पार्टी छोड़ दो, मैंने पार्टी छोड़ने की औपचारिकता पूरी की। फिर पार्टी ने कहा कि वापस आ जाओ तो पार्टी का आदेश सर्वमान्य करते हुए मैं वापिस आ गया। मैंने कभी ईफ एंड बट नहीं की। पार्टी ने जब जो कहा मैंने किया। जहां ड्यूटी लगाई वहीं से काम शुरू कर दिया।
संगठन में मैं पला-बढ़ा और संगठन के संस्कार मेरी नस-नस में हैं : विज
उन्होंने बातचीत के दौरान साफ किया कि संगठन में वह पले- बढ़े। संगठन ने हमेंशा यही संस्कार दिए कि “डिजर्व नोट डिजायर”। उन्ही संस्कारों को मैंने जीवन में उतारा। इसीलिए मैंने कभी भी संगठन से- अपनी पार्टी से किसी भी पद की या मंत्रालय की कोई मांग नहीं की। जब-जब हमारी सरकार बनी, सभी विधायको की तरह मैं कभी दिल्ली नहीं पहुंचा। मैं हमेशा अपने अंबाला कैंट में रहा। ना ही मैंने आज तक अपने लिए किसी से कुछ माँगा।
भाजपा जुगाड़ वाली नहीं लोकतांत्रिक पार्टी है:विज
अनिल विज ने भाजपा को लोकतांत्रिक पार्टी बताया। वहीं बिना नाम लिए कांग्रेस पर कटाक्ष किया कि हमारी पार्टी कोई पारिवारिक पार्टी नहीं है, न ही जुगाड़ वाली पार्टी है। हमारी पार्टी का एक सिस्टम होता है और पार्टी का पूरा हक कार्यकर्ता पर होता है। मैं पार्टी का सच्चा सिपाही हूं और पार्टी जहां मुझे खड़ा करेगी मैं हमेशा पार्टी की सेवा के लिए काम करता रहा हूं और करता रहूंगा।
मेरे बोलने से कांग्रेस पहले भी डरती थी और आज भी डरती है: विज
सबसे सीनियर विधायक होने के नाते मेरे अनुभव का लाभ पार्टी को मिलना चाहिए : विज
विज ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष व सत्तापक्ष दोनों अहम रोल रखते है। लेकिन कांग्रेस दोनों में फेल रही है। जब सत्ता में थी तो भी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा पाई। आज विपक्ष में भी अपनी भूमिका में कहीं नजर नहीं आ रही। हम जब विपक्ष में थे मैं इनकी हर कमी को हर मुद्दे को जोर शोर से आंकड़ों सहित उठाता था। इसलिए ये मुझसे डरते थे, जिस कारण सदन में मैं उस दौरान का सबसे ज्यादा बाहर निकाले जाने वाला विधायक था। आज जब ये विपक्ष में है झूठे मुद्दे बिना आंकड़ों सहित लाते हैं मैं आंकड़ों के साथ बात करता हूं। इसी कारण इन्हें डर लगता है। मैं लोकतंत्र में विश्वास करने वाला व्यक्ति हूं। अपनी सरकार में भी अनेकों ऐसे मंच है जहां हम बात रखते हैं। अपनी राय रखना एक प्रजातांत्रिक अधिकार है। कई बार उस पर आम सहमति भी बनती है और कई बार नहीं भी बन पाती। मेरा मानना है कि सबसे सीनियर विधायक होने के नाते मुझे लगता है कि मेरे अनुभव का लाभ पार्टी को मिलना चाहिए। इसलिए मैं अपनी बात अवश्य रखता हूं। बोलने का अधिकार हमारे संविधान ने हमें दिया है बाबा भीमराव अंबेडकर जी के संविधान में बात कहने की आजादी दी है।
बिना बाहुबल, पैसे और जात-पात की राजनीति के 7 बार का सबसे सीनियर विधायक हूं : विज
अनिल विज ना बदला है ना बदलेगा। अपनी बात बेधड़क से कहता हूं पहले भी कहता था अब भी कहता हूं और कहता ही रहूंगा। इसीलिए जनता मुझे पसंद करती है। उन्होंने कहा कि मेरे जैसा आदमी जिसके पास ना पैसा है, ना बाहुबल है, ना ही जात-पात की राजनीति है। फिर भी 7 बार का सबसे सीनियर विधायक हूं। मैंने ना पैसा कमाया है, ना ही मैं जात-पात की राजनीति की है और ना ही मेरे पास बाहुबल है। मेरे पास केवल और केवल जनता का प्यार और सहयोग है और वही जनता मुझे विधायक बनाती है।
