‘कपल केस’ स्थानांतरण नीति में संशोधन की मांग : विजय बंसल ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भेजा विस्तृत ज्ञापन

विक्रांत शर्मा /रमोला न्यूज़ ब्यूरो
पंचकूला, 1 अगस्त। शिवालिक विकास मंच, हरियाणा के अध्यक्ष एवं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव विजय बंसल, एडवोकेट ने हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी को एक विस्तृत ज्ञापन भेजकर राज्य सरकार की मॉडल ऑनलाइन स्थानांतरण नीति, 2026 में “कपल केस (Couple Case)” से संबंधित प्रावधान में आवश्यक संशोधन करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान नीति का उद्देश्य परिवारों को साथ रखने का है, किंतु इसका वर्तमान स्वरूप हजारों ऐसे सरकारी कर्मचारियों के साथ भेदभाव कर रहा है, जिनके पति या पत्नी सरकारी विभागों के बजाय अन्य वैध एवं नियमित संस्थानों में कार्यरत हैं।

ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान स्थानांतरण नीति के अनुसार “कपल केस” के अंतर्गत दिए जाने वाले 10 मेरिट अंक केवल उन सरकारी कर्मचारियों को मिलते हैं, जिनके जीवनसाथी सरकारी अथवा सरकार के नियंत्रणाधीन संस्थानों में कार्यरत हैं। जबकि जिन कर्मचारियों के जीवनसाथी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), राष्ट्रीयकृत एवं निजी बैंक, सार्वजनिक उपक्रम (PSUs), विश्वविद्यालय, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों, अतिथि अध्यापक (Guest Teachers), निजी कंपनियों, उद्योगों, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र अथवा अन्य किसी वैध एवं सत्यापन योग्य रोजगार, व्यवसाय या स्वरोज़गार में कार्यरत हैं, उन्हें इस लाभ से पूरी तरह वंचित रखा गया है।

विजय बंसल ने कहा कि “कपल केस” नीति का वास्तविक उद्देश्य पति-पत्नी को यथासंभव एक ही स्थान अथवा निकटवर्ती स्थान पर कार्य करने का अवसर उपलब्ध कराना, पारिवारिक एकता को सुदृढ़ करना तथा बच्चों एवं परिवार पर पड़ने वाले सामाजिक, मानसिक और आर्थिक दुष्प्रभावों को कम करना है। किंतु वर्तमान नीति केवल इस आधार पर पात्रता तय करती है कि जीवनसाथी किस संस्थान में कार्यरत है। उन्होंने कहा कि परिवार की समस्याएँ इस बात से नहीं बदलतीं कि जीवनसाथी सरकारी सेवा में है या निजी क्षेत्र में। इसलिए केवल नियोक्ता के आधार पर किया गया यह वर्गीकरण नीति के वास्तविक उद्देश्य से किसी भी प्रकार का तार्किक संबंध (Rational Nexus) स्थापित नहीं करता।

उन्होंने कहा कि विडम्बना यह है कि इस नीति से सबसे अधिक प्रभावित वही सरकारी कर्मचारी हैं, जिनके जीवनसाथी निजी क्षेत्र, बैंकिंग, बीमा, उद्योग अथवा अन्य गैर-सरकारी संस्थानों में कार्यरत हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों में स्थानांतरण की सुविधाएँ अत्यंत सीमित होती हैं। परिणामस्वरूप ऐसे परिवार लंबे समय तक अलग-अलग स्थानों पर रहने को विवश होते हैं। जिन कर्मचारियों को इस नीति के संरक्षण की सबसे अधिक आवश्यकता है, वर्तमान व्यवस्था उन्हीं को इसके लाभ से वंचित कर रही है।

विजय बंसल ने ज्ञापन में यह भी कहा कि LIC, राष्ट्रीयकृत एवं निजी बैंक, सार्वजनिक उपक्रम, विश्वविद्यालय, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान, अतिथि अध्यापक तथा अन्य नियमित एवं सत्यापन योग्य सेवाओं में कार्यरत लाखों कर्मचारी भी राज्य एवं देश की आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। केवल इस आधार पर कि उनका नियोक्ता राज्य सरकार नहीं है, उन्हें “कपल केस” नीति के लाभ से बाहर रखना न तो न्यायसंगत है और न ही समानता के सिद्धांतों के अनुरूप है।

उन्होंने मुख्यमंत्री का ध्यान इस तथ्य की ओर भी आकर्षित किया कि वर्तमान प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 में निहित समानता एवं समान अवसर की संवैधानिक गारंटी की कसौटी पर पुनर्विचार योग्य है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 14 के अंतर्गत कोई भी वर्गीकरण तभी वैध माना जाता है, जब वह युक्तिसंगत वर्गीकरण (Reasonable Classification) के सिद्धांत पर आधारित हो तथा उसके पीछे बौद्धिक भिन्नता (Intelligible Differentia) और नीति के उद्देश्य से तार्किक संबंध (Rational Nexus) हो। वर्तमान नीति में जीवनसाथी के नियोक्ता के आधार पर किया गया वर्गीकरण इन संवैधानिक मानकों पर खरा नहीं उतरता।

विजय बंसल ने यह भी सुझाव दिया कि यदि जीवनसाथी के रोजगार, सेवा अथवा व्यवसाय का सत्यापन नियुक्ति पत्र, सेवा प्रमाणपत्र, वेतन पर्ची, EPFO/ESIC अभिलेख, आयकर विवरण, जीएसटी पंजीकरण अथवा अन्य उपयुक्त दस्तावेजों के माध्यम से अनिवार्य कर दिया जाए, तो दुरुपयोग की किसी भी आशंका को प्रभावी रूप से समाप्त किया जा सकता है।

उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि मॉडल ऑनलाइन स्थानांतरण नीति, 2026 में आवश्यक संशोधन करते हुए “कपल केस” के अंतर्गत मिलने वाले 10 मेरिट अंक का लाभ उन सभी पात्र सरकारी कर्मचारियों को प्रदान किया जाए, जिनके जीवनसाथी हरियाणा, चण्डीगढ़ अथवा दिल्ली में किसी भी वैध, नियमित एवं सत्यापन योग्य रोजगार, सेवा, व्यवसाय अथवा पेशे में कार्यरत हैं, चाहे वे केन्द्र अथवा राज्य सरकार, LIC, राष्ट्रीयकृत अथवा निजी बैंक, सार्वजनिक उपक्रम, विश्वविद्यालय, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान, अतिथि अध्यापक, निजी क्षेत्र, उद्योग, आईटी संस्थान, व्यापारिक प्रतिष्ठान अथवा स्वरोज़गार से जुड़े हों।

विजय बंसल ने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जनहित, पारिवारिक मूल्यों तथा संविधान द्वारा प्रदत्त समानता एवं समान अवसर की गारंटी को ध्यान में रखते हुए इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा कि इस संशोधन से न केवल हजारों सरकारी कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को राहत मिलेगी, बल्कि “कपल केस” नीति भी अपने वास्तविक उद्देश्य के अनुरूप अधिक न्यायसंगत, व्यावहारिक और प्रभावी बन सकेगी।

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