*हरियाणा की डायरी*
*प्रस्तुति : चन्द्र शेखर धरणी*
*वरिष्ठ, स्वतंत्र पत्रकार*
हरियाणा मे भजपा सरकार मे पिछले 12 वर्षो से एक मात्र मंत्री हैं अनिल विज जिन्होंने चंडीगढ़ सरकारी कोठी कभी नहीं ली। अम्बाला कैंट से चंडीगढ़ अप डाउन करते हैं। वह अपने घर से बाहिर रहना, दिल्ली परिक्रमा भी नहीं करते।हाल ही मे बिजली कर्मियों की हड़ताल के चलते अनिल विज को पंचकुला रेस्ट हॉउस मे रुकना व रात्रि जागना पढ़ा। बिजली विभाग के अधिकारियो के इलावा कानूनी पहलयुओं पर मंथन किया व विज के इस मंथन मे धारा 108 निकली। उसी ने बिजली कर्मचारियों की हड़ताल वापिस करवा दी।
अनिल विज ने कर्मचारियों के नेताओं से भी सीधी बात की तब जाकर वह आने को माने। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी मे आख़िरकार हड़ताल वापिस हो गई।
*सी एम के सारथी राजेश ख़ुललर*
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार के दूसरे कार्यकाल में मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर प्रशासन की सबसे अहम कड़ियों में शामिल हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के भरोसेमंद अधिकारियों में शुमार रहे खुल्लर ने नायब सिंह सैनी के साथ भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका बरकरार रखी है। करीब 35 वर्षों का प्रशासनिक अनुभव, नीतिगत मामलों की समझ, मधुर व्यवहार और समस्याओं के समाधान की दिशा में सक्रियता उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषताएं हैं।हरियाणा के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में खुल्लर की पहचान ऐसे अधिकारी के रूप में है, जो मंत्रियों, विधायकों और नेताओं की बात सुनने के साथ संबंधित मामलों में समाधान तलाशने का प्रयास करते हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में उनकी भूमिका केवल फाइलों के निस्तारण तक सीमित नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं, विभागीय समन्वय और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को गति देने से भी जुड़ी है।
मनोहर लाल से नायब सैनी तक कायम रहा भरोसाराजेश खुल्लर नवंबर 2015 से सितंबर 2020 तक तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रधान सचिव रहे। सितंबर 2020 में वह विश्व बैंक में कार्यकारी निदेशक की जिम्मेदारी संभालने चले गए। 31 अगस्त 2023 को आईएएस सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें एक सितंबर 2023 को हरियाणा के मुख्यमंत्री का मुख्य प्रधान सचिव नियुक्त किया गया।मनोहर लाल के बाद नायब सिंह सैनी के मुख्यमंत्री बनने पर भी उनकी भूमिका बनी रही। अक्टूबर 2024 में सैनी सरकार में उनकी नियुक्ति से संबंधित आदेश जारी किए गए।
…. स्मृति ईरानी की वीआईपी कल्चर पर चोट
हरियाणा भाजपा प्रभारी स्मृति ईरानी ने पार्टी में वीआईपी कल्चर पर सवाल उठाते हुए जिला प्रधानों से स्वेच्छा से सुरक्षा गार्ड छोड़ने और आम कार्यकर्ता की तरह जनता के बीच रहने को कहा। पंचकूला स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में जिला प्रधानों और प्रभारियों की बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि पद मिलने का मतलब खुद को कार्यकर्ताओं से अलग करना नहीं है।स्मृति ने अपनी सुरक्षा का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा मिली है, लेकिन वह अक्सर इसका इस्तेमाल नहीं करतीं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा का तामझाम जनता और कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद में बाधा नहीं बनना चाहिए।बैठक में एनसीआर के एक जिले के प्रधान के लाव-लश्कर का मामला भी उठा। स्मृति का संदेश साफ था कि पदाधिकारियों की पहचान उनके पद या सुरक्षा से नहीं, बल्कि जनता से जुड़ाव और संगठन के प्रति उनकी सक्रियता से होनी चाहिए।
….राम बिलास शर्मा और अनिल विज को खास तवज्जो
हरियाणा भाजपा के दिग्गज नेता प्रो. राम बिलास शर्मा और कैबिनेट मंत्री अनिल विज की मौजूदगी ने संत कबीर कुटीर में आयोजित स्वागत कार्यक्रम को खास राजनीतिक महत्व दिया।भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री एवं हरियाणा प्रभारी स्मृति जुबिन ईरानी और सह-प्रभारी डॉ. भोला सिंह के प्रथम आगमन पर दोनों नेताओं को चुनिंदा अतिथियों के रूप में आमंत्रित किया गया।राम बिलास शर्मा कई बार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। उनके नेतृत्व में 2014 में भाजपा ने पहली बार हरियाणा में अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी।वहीं, सातवीं बार विधायक बने अनिल विज की पहचान भाजपा के संघर्ष के दौर में मुखर विपक्षी नेता के रूप में रही है।
कांग्रेस शासन के दौरान विज ने विधानसभा और अन्य मंचों पर जनहित के मुद्दे उठाए तथा भाजपा के अकेले चुनाव लड़ने की पैरवी की।दोनों नेताओं ने दशकों तक जनसंघ और भाजपा के संगठन को मजबूत करने में योगदान दिया है।स्मृति ईरानी के पहले आगमन पर इन दोनों अनुभवी नेताओं को आमंत्रित किया जाना प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक इतिहास और वर्तमान नेतृत्व के बीच महत्वपूर्ण जुड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।
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*दोस्तो के दोस्त अनिल विज*
हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने एक बार फिर पत्रकारों के प्रति अपनी संवेदनशीलता और आत्मीयता का परिचय दिया। पंचकूला में अस्वस्थ चल रहे वरिष्ठ पत्रकार मनबीर सैनी के निवास पर पहुंचकर उन्होंने उनका कुशलक्षेम जाना और स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। अनिल विज का यह कदम पत्रकारिता जगत के प्रति उनके सम्मान और व्यक्तिगत संबंधों को महत्व देने वाली कार्यशैली को दर्शाता है।अनिल विज की पहचान केवल एक वरिष्ठ राजनेता और मंत्री के रूप में ही नहीं, बल्कि ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में भी रही है, जो अपने परिचितों और सहयोगियों के सुख-दुख में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने का प्रयास करते हैं। पत्रकारों के साथ उनके लंबे समय से आत्मीय संबंध रहे हैं। किसी पत्रकार के अस्वस्थ होने, उसके परिवार में परेशानी आने अथवा किसी सुखद अवसर पर अनिल विज की उपस्थिति उनके व्यवहार का महत्वपूर्ण पक्ष मानी जाती है।राजनीति और पत्रकारिता के बीच संबंध लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। पत्रकार जहां जनसमस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने का कार्य करते हैं, वहीं जनप्रतिनिधियों के कामकाज को जनता के सामने रखने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में दोनों के बीच संवाद, परस्पर सम्मान और मानवीय संवेदनशीलता लोकतंत्र को मजबूत बनाने में योगदान देते हैं। अनिल विज का वरिष्ठ पत्रकार मनबीर सैनी के घर पहुंचना इसी मानवीय पक्ष को रेखांकित करता है।
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*सी एम के आधोगिक सलाहकार डॉक्टर अमित अग्रवाल*
हरियाणा को देश के अग्रणी औद्योगिक और निवेश केंद्रों में स्थापित करने के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के विजन को धरातल पर उतारने में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. अमित कुमार अग्रवाल की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के कमिश्नर एवं सचिव के रूप में वह प्रदेश की निवेश रणनीति, औद्योगिक नीतियों और उद्योगों के अनुकूल माहौल तैयार करने से जुड़े प्रयासों का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रशासनिक अनुभव, नीतिगत समझ और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की क्षमता उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषताएं हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ विजन के अनुरूप मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सरकार का लक्ष्य विदेशी निवेश आकर्षित करना, विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार करना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है। इस दिशा में डॉ. अग्रवाल की जिम्मेदारी निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ नीतियों को प्रभावी क्रियान्वयन तक पहुंचाने की भी है।हरियाणा सरकार की ‘मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026’ प्रदेश के औद्योगिक विकास की प्रमुख पहल है। एक जून 2026 को इस नीति सहित 10 सेक्टोरल नीतियां लागू की गईं। इनके माध्यम से अगले पांच वर्षों में पांच लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने और 10 लाख रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
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