जनगणना 2027 में डिजिटल भागीदारी को बढ़ावा: हरियाणा के राज्यपाल ने सफलतापूर्वक किया स्व-गणना पंजीकरण

 

सुमेश कुमार /रमोला न्यूज़

चंडीगढ़: जनगणना 2027 में डिजिटल भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, हरियाणा के माननीय राज्यपाल, प्रो. अशिम कुमार घोष ने आज ऑनलाइन जनगणना पोर्टल के माध्यम से सफलतापूर्वक अपनी स्व-गणना प्रक्रिया पूर्ण की। इस प्रक्रिया में डॉ. नवजोत खोसा, आईएएस, निदेशक, जनगणना संचालन निदेशालय, यूटी चंडीगढ़ तथा श्री निशांत कुमार यादव, आईएएस, उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना अधिकारी, यूटी चंडीगढ़ द्वारा सहयोग प्रदान किया गया। यह पहल यूटी प्रशासन की प्रौद्योगिकी के माध्यम से कुशल, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल जनगणना संचालन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

माननीय राज्यपाल द्वारा स्व-गणना कर उदाहरण प्रस्तुत करते हुए सभी नागरिकों को इस सुरक्षित एवं सुविधाजनक डिजिटल प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया है। स्व-गणना के माध्यम से नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन जनगणना विवरण भर सकते हैं, जिससे आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित होती है तथा नागरिकों और गणनाकर्मियों दोनों का समय बचता है।

इस अवसर पर माननीय राज्यपाल ने प्रभावी योजना निर्माण एवं नीतिगत निर्णयों के लिए सटीक आंकड़ों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे स्व-गणना सुविधा का अधिकतम उपयोग करें, जिसे सरल, सुलभ एवं उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया गया है।

जनगणना संचालन निदेशालय, यूटी चंडीगढ़ तथा उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना अधिकारी, यूटी चंडीगढ़ एवं चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा स्व-गणना प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने हेतु व्यापक प्रबंध किए गए हैं। नागरिकों की सहायता के लिए एक समर्पित टोल-फ्री हेल्पलाइन (1855 या 18001803821) भी स्थापित की गई है, जहां किसी भी प्रकार की जानकारी या तकनीकी सहायता प्राप्त की जा सकती है।

नागरिकों से आग्रह किया जाता है कि वे आधिकारिक जनगणना पोर्टल पर जाकर निर्धारित समयावधि के भीतर अपनी स्व-गणना प्रक्रिया पूर्ण करें। एकत्रित की गई जानकारी को पूर्णतः गोपनीय रखा जाएगा तथा इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए, जनगणना अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।

माननीय राज्यपाल द्वारा सफलतापूर्वक की गई स्व-गणना, जनगणना 2027 के क्रियान्वयन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और इससे व्यापक जनसहभागिता को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

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