*सकुशल घर लौटनें, अपनों को एक साथ पाने, ईष्ट देवी-देवताओं के प्रति नत मस्तक होंनें की भावना सेवानिवृत समारोह

जसपाल सिंह/रमोला न्यूज
उत्तरकाशी-अपनें 32 वर्षों के सैन्य सेवा से सेवा मुक्त होंनें के बाद सूबेदार मेजर ऑरनरी कैप्टन युवराज सिंह बिष्ट अपनें घर पहुंचे, गाँव, क्षेत्र के लोगों नें गाँव के स्वागत द्वार पर सेवानिवृत युवराज सिंह बिष्ट का फूल माला पहनाकर देव ढोल, गढ़वाली बैंड बाजों के साथ भव्य स्वागत किया, कारगिल युद्ध में दुश्मनों से लोहा लेनें और अपनें कमांडिंग ऑफिसर की परछाई बनकर उनके साथ रहकर कारगिल युद्ध में विजय होंनें का गौरव प्राप्त किया।

सेवानिवृत समारोह में जहाँ भारी संख्या में दूर-दूर से नाते-रिश्तेदार, बंधु-बांधव, यार-मित्र घर पर पहुंचे, वहीं उनके नाते-रिश्तेदारों, चिर-परिचित पूर्व सैनिकों नें संपर्क कर निकटवर्ती बाजारों में उनका स्वागत किया, सेवानिवृत समारोह में पहुंची भीड़ नें साबित कर दिया कि सैन्य बलों के सम्मान में कोई कमी नहीं है, सीमा पर खड़े जवान की बदौलत ही देश का आम नागरिक चैन की नींद सो पाता है, सीमा पर रात दिन अपनी नींदों को खोनें और लाख मुसीबतों में रहने वाला सैनिक ही है जो मातृभूमि ही नहीं देश के 140 करोड़ देशवासियों की रक्षा सुरक्षा रात-दिन कर रहा है, सैन्यबलों की वजह से ही आम आदमी, भारत माता, राष्ट्र सुरक्षित है।

कारगिल युद्ध में सूबेदार मेजर युवराज सिंह बिष्ट नें अपनी सैन्य टुकड़ी के साथ के साथ गोली, गोला-बारुदों, कई आधुनिक हथियारों, मोटारों से डटकर मुकाबला किया, माँ और मातृभूमि की सेवा से भला कोई सेवानिवृत् नहीं होता, लेकिन गोली, गोला, बारुदों को नजदीक से महसूस करनें के बाद सेवानिवृत्ति समारोह बनता ही था, सूबेदार मेजर ऑनररी कैप्टन युवराज सिंह बिष्ट नें नाकुरी स्थित नागेश्वर धाम के दर्शन कर गाँव के आराध्य देव श्री नागराज मन्दिर में माथा टेक भावुक हुए, पुजारी वीरेंद्र सिंह राणा नें तिलक चंदन कर सुफल दिया देवढोल के साथ गढ़वाली लोक संस्कृति, सामाजिक व सैन्य परम्परा का अद्द्भुत मेल देखनें को मिला सैकडों की संख्या में बधाई देंनें लोग और पूर्व सैनिक पहुंचे।

सूबेदार मेजर ऑनररी कैप्टन युवराज सिंह बिष्ट नें सेवानिवृत समारोह में पहुंचे सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया, उन्होंनें कहा कि इस तरह की भीड़ और असीम प्रेम से ग़द्दगद्द हूँ, यह भीड़ निश्चित रूप से सैनिकों के सम्मान को दर्शाती है, यह सम्मान देश के हर एक सैनिक का सम्मान और भारत माता के प्रति प्रेम है, मौत को करीब से देखनें के बाद यह सेवानिवृत समारोह सकुशल घर लौटनें, अपनों को एक साथ पानें और अपने ईष्ट देवी-देवताओ के प्रति नतमस्तक होंनें की भावना हैं।

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