सुरेंद्र सिंह/ रमोला न्यूज़
पिंजौर: जिले में पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल होने वाली तुड़ी (भूसा) की भारी कमी को लेकर पूर्व विधायक प्रदीप चौधरी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में तुड़ी की किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे पशुपालकों और किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदीप चौधरी ने कहा कि कुछ समय पहले तक सामान्य दामों में मिलने वाली तुड़ी अब एक हजार रुपये प्रति क्विंटल से अधिक कीमत पर बिक रही है। ऐसे में छोटे और मध्यम वर्ग के पशुपालकों के लिए पशुओं का पालन करना बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि दूध के दाम खर्च के मुकाबले बहुत कम हैं, जबकि पशुओं के चारे, दवाई और देखभाल का खर्च लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि तुड़ी केवल पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल होती है और यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में पशुपालन क्षेत्र पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
पूर्व विधायक ने सरकार से मांग की कि तुड़ी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर तुरंत रोक लगाई जाए तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को उचित दामों पर चारा उपलब्ध करवाने के लिए विशेष व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों और पशुपालकों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द राहत प्रदान करनी चाहिए।
