रोमी सिंह /रमोला न्यूज़
पंचकूला, 2 मई : पारस हेल्थ पंचकूला ने एक जटिल कैंसर केस में सटीक रेडिएशन थेरेपी का सफल उपयोग करते हुए 66 वर्षीय महिला की जान बचाने के साथ उनकी ट्रांसप्लांट की गई किडनी को भी सुरक्षित रखा। विशेषज्ञों ने बताया कि नई तकनीकों के कारण अब ऐसे मरीजों का इलाज भी संभव है, जिनमें सर्जरी या कीमोथेरेपी जोखिम भरी होती है। मरीज की दोनों किडनी पहले ही खराब हो चुकी थीं और 11 वर्ष पूर्व उनका किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था, जिसके बाद से वह लगातार इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं ले रही थीं। इसी दौरान उन्हें बड़ी आंत के निचले हिस्से में होने वाला रेक्टोसिग्मॉइड कैंसर हो गया।
मरीज की जटिल मेडिकल स्थिति के कारण न तो सर्जरी संभव थी और न ही कीमोथेरेपी सुरक्षित मानी गई। ऐसे में डॉक्टरों ने एडवांस्ड रेडिएशन थेरेपी को उपचार का विकल्प चुना। इस केस की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ट्यूमर और ट्रांसप्लांट किडनी दोनों पेल्विक क्षेत्र में मौजूद थे, जिससे इलाज के दौरान किडनी को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी था।
रेडिएशन ऑन्कोलॉजी टीम ने इमेज-गाइडेड रेडिएशन थेरेपी तकनीक का उपयोग करते हुए अत्यंत सटीक योजना बनाई। मरीज को लगभग 5.3 सप्ताह में रेडिएशन डोज़ 28 हिस्सों में दी गई, जिससे ट्यूमर को प्रभावी ढंग से खत्म किया जा सका और आसपास के स्वस्थ अंगों को नुकसान से बचाया गया।
पारस हेल्थ पंचकुला के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. पंकज मित्तल ने कहा, “ऐसे जटिल मामलों में जहां पारंपरिक इलाज संभव नहीं होता, वहां सटीक रेडिएशन थेरेपी प्रभावी विकल्प बनकर उभरती है। उन्नत तकनीक और सटीक योजना के जरिए न केवल कैंसर का इलाज किया जा सकता है, बल्कि महत्वपूर्ण अंगों को भी सुरक्षित रखा जा सकता है, जिससे मरीज की जीवन गुणवत्ता बेहतर होती है।”
इलाज के दौरान मरीज की सेहत पर लगातार नजर रखी गई और ब्लड व किडनी फंक्शन की नियमित जांच की गई। उपचार के डेढ़ महीने बाद की जाँच में स्कैन में कैंसर पूरी तरह समाप्त पाया गया, जबकि ट्रांसप्लांट किडनी सामान्य रूप से कार्य करती रही और कोई साइड इफेक्ट नहीं देखा गया।
