आपकी सरकार पर नायब के हमले और तेज

“हरियाणा की डायरी”

प्रस्तुति: चन्द्र शेखर धरणी
वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार

पिछले लंबे समय से हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी पंजाब में सक्रिय रूप से फ्रंट फुट की राजनीति कर रहे हैं। जिसके परिणाम भी धरातल पर देखे जा रहे हैं जहां पिछले लंबे समय से भाजपा पार्टी का कुनबा बढ़ रहा है। वही हाल ही में एक या दो नहीं बल्कि पंजाब के 7 राज्यसभा सांसदों का भाजपा में शामिल होने से जहां पार्टी को मजबूती मिली है। वही मुख्यमंत्री नायब सैनी सहित भाजपायों के हौसले और बुलंद हुए हैं। लेकिन विधानसभा सत्र के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के एक वीडियो में उनकी भाषा शैली को लेकर उनके नशे में होने का आरोप लगाए जा रहे हैं। इसको लेकर मुख्यमंत्री नायब सैनी ने एक बार फिर से मान सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि जिनका नारा था एक युद्ध _नशे के विरुद्ध वे खुद ही नशे में है और वह भी लोकतंत्र के मंदिर विधानसभा के भीतर नशा करके पहुंच रहे हैं।
*शहरी सरकार को लेकर भाजपायों ने कसी कमर*
हरियाणा शहरी स्थानीय निकाय चुनावों का राजनीतिक पर आसमानी पारे की भांति चढ़ा हुआ है। सत्ताधारी दल भाजपा की तरफ से मेयर सहित अन्य सदस्यों की टिकट वितरण का कार्य कर दिया गया है। जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रदेश प्रभारी सतीश पूनिया, मुख्यमंत्री नायब सैनी सहित तमाम मंत्रियों से लंबी मंत्रणा और चर्चा के बाद चुनाव की आगामी रणनीति तैयार की है। उल्लेखनीय है कि पिछले चुनाव में भी भाजपा ने लगभग एक तरफा जीत दर्ज की थी। इस बार भी पार्टी नेतृत्व का पूरा जोर क्लीन स्वीप पर रहेगा।
*क्या राव के नेतृत्व में खुलेगा कांग्रेस इस बार खाता?*
बीते शहरी स्थानीय निकाय चुनाव में लगभग सभी नगर निगमों में भाजपा ने एक तरफ जीती थी। पंचकूला यमुनानगर, अंबाला, हिसार ,करनाल सोनीपत, पानीपत, रोहतक, फरीदाबाद ,गुरुग्राम सभी मे भाजपा ने बाजी मारी थी ।एकमात्र मानेसर नगर निगम में राज्य मंत्री राव इंद्रजीत की समर्थक विजई हुई थी। वह भी अब भाजपा में आ चुकी है। ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के लिए यह पहली चुनावी परीक्षा कड़ी होगी। क्योंकि राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के चलते पहले ही पांच विधायक पार्टी से निलंबित किए गए हैं।
*नायब की एनर्जी कमाल*
मुख्यमंत्री नायब सैनी हरियाणा कि शहरी सरकार हेतु कमल खिलाने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। वहीं दूसरी और पड़ोसी राज्य पंजाब में भी उनके कार्यक्रम समानांतर चल रहे हैं। क्योंकि पंजाब में भी नायब के कार्यक्रम प्रदेश के अलग-अलग कोनों में हो रहे हैं। जहां उनका पंजाबी पगड़ी में ठेठ देशी अंदाज खूब पसंद किया जा रहा है। वही हरियाणा में भी वे उतना ही समय निकाल रहे हैं। इससे पूर्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी उनकी कार्य करने की क्षमता की तारीफ करते हुए कह चुके हैं कि भई नायब जी आप तो कमाल हो कभी यहां तो कभी वहां दिन-रात लगे रहते हो कैसे मैनेज कर लेते हो इतना काम।
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हरियाणा की चौपाल
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पंजाब में हरियाणा सरकार के ‘सरदार’
एक लंबे अरसे से पंजाब में फुल खिलाने की कवायद कर रही कमल दल वाली पार्टी ने अब इसे गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है। यहीं कारण है कि पड़ोसी राज्य हरियाणा में सरकार के ‘सरदार’ यानि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी पंजाब में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। हरियाणा में चुनाव के समय किए गए वादों में पूरे किए वादे गिनवाकर वह लगातार पंजाब सरकार पर हमला बोलते रहते हैं। इतना ही नहीं हरियाणा सरकार के बड़े साहब की सक्रियता देखकर एक बार तो पंजाब सरकार के बड़े साहब ने भी हरियाणा में प्रचार का ऐलान कर दिया था। हालांकि उन्होंने ऐसा नहीं किया। तराजू वाले दल से अलग होने के बाद से ही फुल वाले दल की कोशिश है कि वह इस बार पंजाब में सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़े और सत्ता पर काबिज हो सके। इसके लिए हाल ही में फुल वाले दल की ओर से पंजाब में मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए झाड़ू वाले दल के कई नेताओं को अपने दल में शामिल भी करवाया। इसे लेकर राजनीतिक चौपालों के अलावा पूरे देश की राजनीति में चर्चाएं जोरों पर है। हालांकि इन नेताओं के राजनीतिक भविष्य का क्या फैसला होगा ? इस पर अभी संशय बना हुआ है, लेकिन जो भी हो पंजाब के चुनाव से पहले ही हरियाणा और पंजाब की राजनीतिक चौपालों पर गर्मी के इस मौसम में गर्माहट और बढ़ गई है।
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अब रंगीला होगा पंजाब !
राजनेता कब और कहां पर क्या बयान दें दे कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसे में उनके राजनीतिक बयानों को लेकर कई प्रकार की चर्चाएं भी शुरू हो जाती है। लगातार पंजाब के दौरे हरियाणा सरकार के मुखिया का भी एक बयान आजकल राजनीतिक चौपालों पर खूब चर्चाओं में है। दअरसल, पंजाब के गोबिंदगढ़ में पहुंचे हरियाणा सरकार के मुखिया अरे भाई मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब की सरकारों पर तंज कसते हुए कहा कि पिछली सरकारों ने पंजाब को कंगला बनाया है, लेकिन भाजपा यानि फुल वाले दल की सरकार बनने पर इसे फिर से रंगीला पंजाब बनाया जाएगा। अब तक हमने रंगला पंजाब तो सुना था, लेकिन पंचायत में रंगीला पंजाब शब्द सुनकर हम भी हैरान हो गए। ऐसे में हमने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि यह शब्द सरकार की आंख, कान और कान कहे जाने वाले विभाग यानि लोक संपर्क विभाग की देन है। चौपाल पर चलने वाली चर्चाओं में पता चला कि विभाग की ओर से मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर जारी की गई विज्ञप्ति में ही रंगीला पंजाब का जिक्र किया गया था। जब इतना पता चला तो हम भी चुप हो गए, शायद हो सकता है कि इस रंगीला शब्द के पीछे कुछ और कारण या मकसद रहे हो, जिन्हें हरियाणा सरकार के बड़े साहब पंजाब में फुल वाले दल की सरकार आने पर पूरा करना चाहते हैं। खैर चौपाल पर मौजूद लोग भी यहीं सोच रहे थे कि देखते है कि पंजाब रंगला से रंगीला कैसे होता है? मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब के उद्योगपतियों को कहा कि पंजाब के सामने एक स्पष्ट विकल्प है। एक तरफ है विकास, स्थिरता और निर्णायक नेतृत्व है तो दूसरी तरफ अस्थिरता, भ्रम और वादाखिलाफी है। अब आप सबको मिलकर यह तय करना है कि आप किस दिशा में जाना चाहते हैं। इतना ही नहीं नायब सैनी ने तो पंजाब के उद्योगपतियों द्वारा सौंपे गए मांगपत्र को केंद्र सरकार से मिलकर उनके समाधान का आश्वासन दिया और कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की सरकार बनाओगे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब को भी विकास के मामले में नंबर वन सूबा बना देंगे।
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गब्बर ने किसे कह दिया गठरी फोड़ ?
हरियाणा के दबंग मंत्री अनिल विज अपने किसी ना किसी बयान को लेकर हमेशा चर्चा में रहते हैं। ऐसे में पिछले कईं दिनों के बाद उन्होंने राजनीति को लेकर एक ऐसा बयान दिया, जो राजनीतिक चौपालों पर खूब चर्चा में हैं। दअरसल, हाल ही में झाड़ू वाले दल में चली झाड़ू यानि एक साथ 7 सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद शुरू हुए विवाद पर हरियाणा सरकार के गब्बर और दबंग कहलाए जाने वाले मंत्री अनिल विज ने बयान दाय कि झाड़ू वाले दल के 7 सांसदों के आने से फुल वाले दल को लाभ होगा। अनिल विज ने कहा कि राघव चड्ढा अकेले नहीं आए हैं, उनके साथ सात राज्यसभा सांसद भी इकट्ठे होकर आए हैं और आम आदमी पार्टी की गठरी फोड़ कर आए हैं। अनिल विज ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि आप जो कुछ भी आज तक बोलती रही या दिखाती रही, और अन्ना हजारे के आंदोलन से मिले समर्थन को चुरा कर यह आम आदमी पार्टी बनी थी और भ्रष्टाचार हटाने के मुद्दे पर बनी थी लेकिन अब उनके सांसद ही कह रहे हैं कि अपने मुद्दे से आप पार्टी वाले हट चुके हैं तथा यह पार्टी अपने मुद्दे से दूर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इन सभी सांसदों की सदस्यता को राज्यसभा के अध्यक्ष ने मान्यता दे दी है।.
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अब कोर्ट करेगा फैसला !
झाड़ू वाला दल यानि आम आदमी पार्टी छोड़कर फुल वाले दल में शामिल होने वाले नेताओं को लेकर इन दिनों काफी चर्चा है। हर जगह और चौपाल पर यहीं मुद्दा सुनाई देता है। हालांकि पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को लेकर आप की ओर से एक्शन भी लिया गया। एक और उनकी सदस्यता रद्द करने की अपील की गई। वहीं, पंजाब में सरकार ने उनकी सुरक्षा वापस ले ली। हालांकि राज्य सरकार की ओर से सुरक्षा वापस लिए जाने पर केंद्र ने उन्हें सुरक्षा मुहैया करवा दी, लेकिन राज्यसभा सांसद और पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने अपनी सुरक्षा वापस लिए जाने के फैसले को चुनौती दी है। उन्होंने इस मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में पिटीशन दाखिल करते हुए अपनी सुरक्षा बहाल करने की मांग की है। पूर्व क्रिकेटर ने अपनी याचिका में पूछा है कि आखिर किस आधार पर उनकी सुरक्षा हटाई गई। इसके साथ ही उन्होंने उस घटना पर कार्रवाई की मांग भी की है। इसमें कथित तौर पर उनके घर के बाहर ‘गद्दार’ लिख दिया गया था और भीड़ ने हमला करने की कोशिश की थी। इस मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार और केंद्र सरकार दोनों को नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब मांगा है। कोर्ट ने पंजाब सरकार से सुरक्षा समीक्षा के आधार पर जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पंजाब सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि किस आधार पर सुरक्षा समीक्षा करते हुए इसे हटाने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही ‘गद्दार’ लिखे जाने की घटना पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी भी मांगी गई है। चलिए अब आपकों पूरा मामला समझाते हैं, दअरसल, राघव चड्ढा ने कहा था कि उनके सहित कई राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल होने वाले हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने वाले अन्य सांसदों में उनके अलावा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता और हरभजन सिंह का नाम लिया था। इसके बाद रविवार को भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने हरभजन सिंह की सुरक्षा वापस ली थी। राघव चड्ढा के इस बयान के बाद सियासी माहौल गर्मा गया था। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने हरभजन सिंह के आवास के बाहर प्रदर्शन किया था। इस दौरान नारेबाजी भी हुई। कुछ घंटों बाद केंद्र सरकार ने मामले में हस्तक्षेप किया और हरभजन सिंह को सीआरपीएफ की ओर से वाई-कैटेगरी की सुरक्षा दी गई।
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काश सभी पुलिस वाले ऐसे होते…?
हरियाणा के भिवानी में 27 अप्रैल को एक निजी बस में आग लग गई थी। इस हादसे में एएसआई सुनील समेत दो लोगों की मौत हो गई थी।अब दोनों मृतकों की पहचान हो गई है। एक मृतक एक भिवानी में सीआईडी के गुप्तचर विभाग के एएसआई थे। हर कोई अब सुनील के साहस की सराहना कर उसे शहीद का दर्जा देने की मांग कर रहा है, क्योंकि उन्होंने औरों की जान बचाने के लिए अपनी जान गंवा दी। सुनील के शव पर पुष्प चक्र अर्पित कर एसपी सुमीत कुमार ने सुनील के सीआईडी में रहते हुए सामाजिक कार्यों से जुड़े रहने और आग के बीच पूरे जज़्बे के साथ ख़ाकी की लाज रखते हुए जान गँवाने पर दुख जताया. उन्होंने कहा कि इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है पर जांच फ़ोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद शुरू होगी. एसपी ने कहा कि पुलिस विभाग सुनील के परिवार के साथ खड़ा है और पुलिस विभाग हर कानून पहलू से पीड़ित परिवार की मदद करेगा. बताया जा रहा है कि एएसआई सुनील अपनी तनख़्वाह के पैसे से सड़कों पर घूमने वाले गरीब बच्चों को स्कूल में पढ़ाते थे।

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