नकारात्मक ऊर्जा का नाश धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता के जागरण से होता है:अनिल विज

 

*माता का जागरण भक्तों के लिए अपनी श्रद्धा प्रकट करने का एक सशक्त माध्यम: हरविंदर कल्याण

*भजन और ध्यान के माध्यम से मानसिक तनाव कम होता है: भंडारी

*जीवन में सकारात्मकता, आस्था और सामाजिक समरसता लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम:वरुण मुलाना

रिपोर्ट :कोमल रमोला
चंडीगढ़: माता भगवती जागरण का आयोजन वरिष्ठ पत्रकार चन्द्र शेखर धरणी के परिवार द्वारा किसान भवन पंचकुला में करवाया गया।इस अवसर पर हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण, हरियाणा के ऊर्जा,परिवहन व श्रम मंत्री अनिल विज, हरियाणा के पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार, हरियाणा के शिक्षा मंत्री मही पाल ढांडा, हरियाणा के निकाय मंत्री विपुल गोयल, डिप्टी स्पीकर कृष्ण मिढ़ा, हरियाणा राज्य चुनाव आयोग के आयुक्त देवेंद्र कल्याण,अंबाला के सांसद वरुण मुलाना,सी एम के राजनैतिक सचिव तरुण भंडारी,सी एम के मीडिया सैक्ट्री प्रवीण अत्रेय व कई जानी मानी कई प्रशासनिक,राजनैतिक व सामाजिक हस्तियां पहुंची।
मां भगवती जागरण का आयोजन धरणी परिवार द्वारा हरियाणा ई एस आई हैल्थ केयर विभाग मुख्यालय से एडिशनल डायरेक्टर नर्सिंग पद से रीता शर्मा की सेवानिवृत्ति के उपलक्ष्य में किया गया।गौर तलब है कि हरियाणा के ई एस आई इतिहास में हरियाणा गठन के बाद नर्सिंग कैडर से ए डी एन के पद पर पहुंचने वाली पहली महिला हैं।
हरियाणा के ऊर्जा,परिवहन व श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि मा भगवती का जागरण सुख समृद्धि पारिवारिक व सामाजिक सुख शांति व खुशहाली का परिचायक है। माता अपने बच्चों का ध्यान खुद ही रखती है।
अनिल विज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में देवी-उपासना का विशेष स्थान रहा है, और “माता का जागरण” इसी भक्ति परंपरा का एक जीवंत और आध्यात्मिक रूप है। जागरण केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और सामूहिक आस्था का ऐसा उत्सव है, जिसमें भक्त पूरी रात जागकर मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का गुणगान करते हैं।
अनिल विज ने कहा कि नकारात्मक ऊर्जा का नाश धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जहां माता का जागरण होता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मंत्रोच्चार, घंटियों की ध्वनि और भक्ति संगीत से वातावरण पवित्र बनता है, जिससे नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और घर-परिवार में सुख-शांति आती है।
विज ने कहा कि जागरण केवल व्यक्तिगत आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता और भाईचारे का भी प्रतीक है। इसमें समाज के सभी वर्गों के लोग एक साथ मिलकर भाग लेते हैं, जिससे आपसी प्रेम और सहयोग की भावना मजबूत होती है।
हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने कहा कि आस्था और भक्ति का संगम माता का जागरण भक्तों के लिए अपनी श्रद्धा प्रकट करने का एक सशक्त माध्यम है। इस दौरान भजन-कीर्तन, कथा, और देवी गीतों के माध्यम से मां की महिमा का वर्णन किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से किया गया जागरण मां को प्रसन्न करता है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
कल्याण ने कहा संस्कार और परंपरा का संरक्षण माता के जागरण के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, भक्ति और परंपराओं से जोड़ने का अवसर मिलता है। बच्चों और युवाओं में धार्मिक भावनाएं जागृत होती हैं और वे अपनी जड़ों से जुड़ते हैं।
हरियाणा के मुख्यमंत्री के राजनैतिक सचिव तरुण भंडारी ने कहा कि आध्यात्मिक शांति और मानसिक संतुलन
पूरी रात भक्ति में लीन रहना मन को शांति देता है। भजन और ध्यान के माध्यम से मानसिक तनाव कम होता है और आत्मिक संतुलन प्राप्त होता है। यह एक तरह से ध्यान और साधना का भी रूप है।
अंबाला के सांसद वरुण मुलाना ने कहा कि माता का जागरण केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मकता, आस्था और सामाजिक समरसता लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यह हमें न केवल मां के प्रति श्रद्धा सिखाता है, बल्कि समाज के साथ मिलकर चलने और आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा भी देता है।
तरुण भंडारी ने कहा कि माता शेरों वाली का जागरण केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संगम है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के जागरण में भक्त पूरी रात भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और ध्यान के माध्यम से मां दुर्गा की आराधना करते हैं, जिससे मन को शांति मिलती है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।
उन्होंने आगे कहा कि माता के जागरण से जहां एक ओर नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है, वहीं दूसरी ओर समाज में आपसी भाईचारा, एकता और आध्यात्मिक जागरूकता भी बढ़ती है। ऐसे आयोजनों से लोगों को अपने व्यस्त जीवन से कुछ समय निकालकर आत्मिक जुड़ाव और सुकून प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
तरुण भंडारी ने यह भी कहा कि माता शेरों वाली की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है, इसलिए इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों का समाज में विशेष महत्व है।

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