भगवान सब कुछ सहन करते हैं, अहंकार नहीं: आचार्य कृष्ण नयन

सुरेश चंद रमोला/ रमोला न्यूज़

उत्तरकाशी : श्रीमद् भागवत कथा के प्रवचन में कथा व्यास आयुष कृष्ण नयन महराज जी ने स्पष्ट किया कि भगवान सृष्टि के सभी कष्ट और दु:ख सहन कर सकते हैं, लेकिन अहंकार के प्रति उनकी सहनशीलता नहीं है। व्यास जी ने बताया कि अहंकार इंसान और भक्ति के मार्ग में सबसे बड़ा बाधक है।
कथा के दौरान व्यास जी ने उदाहरण स्वरूप गोपियों का त्याग किया। बताया गया कि गोपियों में भी अहंकार आ गया था, इसलिए उन्होंने उनसे दूरी बना ली। इस घटनाक्रम के बावजूद, गोपियों ने अपनी भक्ति और गीत के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रोता उनकी भक्ति और भावपूर्ण गीतों से अत्यंत प्रभावित हुए।
यह प्रसंग दर्शाता है कि भक्ति में निस्वार्थ समर्पण आवश्यक है और अहंकार भक्ति की शुद्धता में बाधा डालता है।
तहसील बड़कोट अंतर्गत ठकराल पट्टी के नगाण गांव में भाजपा नेता मनवीर सिंह चौहान की धर्मपत्नी स्वर्गीय उमा चौहान के वार्षिक श्रद्धा एवं पित्रों के उद्घार के लिए श्रीमद्भागवत पुराण कथा के के छठे दिन प्रवचन करते हुए
व्यास जी ने गोपियों की अद्भुत प्रेम और भक्ति से जुड़ी कथा का ऐसा रसपूर्ण वर्णन किया कि पंडाल में उपस्थित सभी श्रोता भाव-विभोर हो उठे।
व्यास जी ने अपने प्रवचन में बताया कि गोपियों का भगवान के प्रति प्रेम निष्कलंक, निस्वार्थ और पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह प्रेम सांसारिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊंचाइयों को छूने वाला है, जो हर भक्त को भक्ति मार्ग पर अग्रसर करता है।
कथा के दौरान जैसे ही गोपियों की विरह और मिलन की भावनाओं का वर्णन किया गया, पंडाल में एक अलग ही आध्यात्मिक वातावरण बन गया। कई श्रोताओं की आंखें नम हो गईं और वे भक्ति रस में डूब गए।
कार्यक्रम के अंत में भजन-कीर्तन के माध्यम से माहौल और भी भक्तिमय
“ओ सखी, वृंदावन चलों ल,
काना की मुरली मां नच ऊनी” गढ़वाली भजन से पर श्रोताओं से खचाखच भरा पांडाल में झूम उठे। अंत में भगवान श्रीकृष्ण का विवाह रूक्मणी का उत्सव मनाया गया है। श्रद्धालुओं ने कहा कि इस प्रकार की कथा सुनकर उन्हें आत्मिक शांति और नई ऊर्जा का अनुभव हुआ है।

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