मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने “ह्यूमनिस्ट मॉडर्निटी: द अनबिल्ट चंडीगढ़ ऑफ मैचेय नोविकी” प्रदर्शनी का उद्घाटन किया

सुमेश कुमार /रमोला न्यूज़
चंडीगढ़, 12 मई : “ह्यूमनिस्ट मॉडर्निटी: द अनबिल्ट चंडीगढ़ ऑफ मैचेय नोविकी” प्रदर्शनी का उद्घाटन आज मुख्य अतिथि श्री एच. राजेश प्रसाद, आईएएस, मुख्य सचिव, यू.टी. चंडीगढ़ द्वारा गवर्नमेंट म्यूज़ियम एवं आर्ट गैलरी, सेक्टर 10-सी, चंडीगढ़ में किया गया। इस अवसर पर नई दिल्ली स्थित पोलैंड गणराज्य के दूतावास के मिशन प्रमुख डॉ. पिओत्र एंटोनी श्विताल्स्की भी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर सुश्री मालगोर्ज़ाता वेसिस-गोवेंबियाक, पोलिश इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली; डॉ. सैयद आबिद रशीद शाह, आईएएस, सचिव पर्यटन, चंडीगढ़ प्रशासन; सुश्री ईशा कंबोज, एचसीएस, निदेशक पर्यटन; डॉ. संगीता बग्गा, प्राचार्य, चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर सहित पोलैंड से आए अन्य विशिष्ट अतिथि भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम के दौरान पोलिश वास्तुकार मैचेय नोविकी की चंडीगढ़ संबंधी परिकल्पना पर आधारित एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गई। इसके पश्चात पोलिश गायक मिखाल रुडास द्वारा लाइव संगीत प्रस्तुति दी गई।

यह प्रदर्शनी गवर्नमेंट म्यूज़ियम एवं आर्ट गैलरी, चंडीगढ़ द्वारा पोलिश इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली तथा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्चर एंड अर्बन प्लानिंग, वारसा (पोलैंड) के सहयोग से आयोजित की गई है।

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि श्री एच. राजेश प्रसाद ने कहा कि चंडीगढ़ के लिए यह गर्व का विषय है कि विश्व के महानतम वास्तुकारों में से एक मैचेय नोविकी पर आधारित प्रदर्शनी यहां आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि नोविकी का असामयिक निधन न हुआ होता तो संभवतः चंडीगढ़ का स्वरूप कुछ अलग होता, हालांकि उनकी सोच की झलक आज भी ली कॉर्बुज़िए के डिज़ाइनों में दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि “द सिटी ब्यूटीफुल” की वास्तुकला में दिखाई देने वाली मानवीय संवेदनाएं भी कहीं न कहीं नोविकी की विचारधारा से प्रेरित हैं। उन्होंने नागरिकों की भूमिका पर बल देते हुए कहा कि चंडीगढ़ की इस विशिष्ट विरासत को संरक्षित और और अधिक समृद्ध बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, ताकि यह शहर विश्व के श्रेष्ठतम शहरों में अपनी पहचान बनाए रखे।

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. पिओत्र एंटोनी श्विताल्स्की ने कहा कि मैचेय नोविकी के डिज़ाइनों ने कई पीढ़ियों के वास्तुकारों को प्रेरित किया है तथा उनके कार्यों में मानवीय मूल्यों, संस्कृति और पर्यावरण के प्रति गहरी संवेदनशीलता दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि यदि नोविकी चंडीगढ़ परियोजना पर आगे कार्य करते, तो संभवतः भगवद्गीता के दर्शन से प्रेरित तत्व भी शहर की वास्तुकला में दिखाई देते। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नोविकी के विचार युवा वास्तुकारों और विद्यार्थियों को निरंतर प्रेरित करते रहेंगे तथा वास्तुकला एवं शहरी नियोजन के क्षेत्र में नियमित शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की आवश्यकता पर भी बल दिया।

प्रदर्शनी में प्रसिद्ध पोलिश वास्तुकार मैचेय नोविकी के जीवन और कार्यों को प्रदर्शित किया गया है, जिन्होंने वर्ष 1949 में अमेरिकी योजनाकार अल्बर्ट मेयर के साथ मिलकर चंडीगढ़ की प्रारंभिक योजना में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। मूल रेखाचित्रों, मास्टर प्लान और अभिलेखीय सामग्री के माध्यम से यह प्रदर्शनी चंडीगढ़ के लिए नोविकी की उस अप्रकाशित परिकल्पना को प्रस्तुत करती है, जो जलवायु-संवेदनशील योजना, हरित क्षेत्रों और सामुदायिक आधारित शहरी डिज़ाइन पर केंद्रित थी। प्राकृतिक परिदृश्य और निर्मित संरचनाओं के व्यापक समन्वय को नोविकी के मानवीय वास्तु एवं शहरी नियोजन दृष्टिकोण की प्रमुख विशेषता माना जाता है।

प्रदर्शनी में नोविकी के अंतरराष्ट्रीय वास्तु योगदानों को भी प्रदर्शित किया गया है, जिनमें न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की डिज़ाइन प्रक्रिया में उनकी सहभागिता तथा नॉर्थ कैरोलिना स्थित प्रतिष्ठित डॉर्टन एरीना का डिज़ाइन शामिल है।

यह प्रदर्शनी 15 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन प्रातः 10:00 बजे से सायं 4:30 बजे तक आम जनता के लिए खुली रहेगी। संग्रहालय प्रत्येक सोमवार तथा राजपत्रित अवकाश के दिन बंद रहेगा। अधिक जानकारी के लिए museum-chd@nic.in पर ईमेल या 0172-2740261 पर संपर्क किया जा सकता है।

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